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शिक्षक भी बच्चों से सीख सकते हैं ये 5 बातें

हर पोस्ट में शिक्षकों द्वारा बच्चों को सिखाने की बात होती है। इस पोस्ट में हम उन बातों पर नज़र दौड़ाएंगे जो एक शिक्षक अपने बच्चों से सीख सकता है। बच्चे भी 'रोल मॉडल' हो सकते हैं बशर्ते हम उनसे सीखना चाहते हों।

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हम प्रकृति से बहुत कुछ सीखते हैं। उसी तरीके से बच्चे भी अपनी सहज जीवनशैली से हमें बहुत कुछ सिखाते हैं। जैसे जिज्ञासु होना। हर लम्हे को भरपूर जीना।

किसी स्कूल में सबसे पहले कौन आता है? इस सवाल का जवाब होगा। बच्चे। कुछ शिक्षक बच्चों से भी पहले पहुंचने की कोशिश करते हैं, ऐसे शिक्षकों का शुक्रिया कहना होगा कि वे अपने स्कूल के बच्चों की इतनी परवाह करते हैं कि स्कूल खुलने के बाद सारी व्यवस्था करने के लिए ख़ुद समय पर स्कूल पहुंचते हैं। यानी सबसे पहली बात है कि शिक्षक बच्चों से समय से स्कूल आना सीख सकते हैं।

दूसरी सबसे मजेदार बात है कि शिक्षक बच्चों से भरोसा करने लायक बहाना बनाना सीख सकते हैं। स्कूल में बच्चे अक्सर ऐसे बहाने बनाते हैं कि उनपर आसानी से यक़ीन हो जाता है कि सच में ऐसा ही हुआ होगा।

तीसरी बात थोड़ा ग़ौर करने लायक है। शिक्षकों के पास ढेरों ऐसी बातें होती हैं जिनके लिए उनको अपनी बात कहने के लिए शिकायतों का सहारा लेना पड़ता है। शिक्षक बच्चों से दूसरों की शिकायत करने की अदा सीख सकते हैं। बच्चे जिस जिम्मेदारी के साथ अपनी ही क्लास के बाकी बच्चों की शिकायत करते हैं वह काबिल-ए-तारीफ होता है।

चौथी बात शिक्षक बच्चों से छोटी-छोटी बातों पर ख़ुश होना सीख सकते हैं। शिक्षकों के पास अपने काम से जुड़ी सैकड़ों ऐसी छोटी-छोटी उपलब्धियां होती हैं जिनके ऊपर वे ख़ुश हो सकते हैं। अपने काम पर गर्व महसूस कर सकते हैं। मगर वे इसे छोटी-मोटी उपलब्धियों को आमतौर पर नजरअंदाज करते हैं, वे बच्चों की तरह ऐसी उपलब्धियों पर ख़ुश होना सीख सकते हैं। जैसे कोई बच्चा किसी तितली का चित्र बनाकर भी बहुत ख़ुश होता है। अपनी कॉपी में चार अक्षर और कुछ शब्द लिखकर इतना ख़ुश होता है कि वह शिक्षक को दिखाता है कि देखिए सर मैंने क्या लिखा है!!

शिक्षकों के सामने हमेशा कुछ न कुछ नया आता ही रहता है। जैसे-जैसे उनका अनुभव बढ़ता जाता है। वे नई चीज़ों से परेशान होने लगते हैं। ऐसे में बच्चों से वे पांचवीं बात भी सीख सकते हैं, “हमेशा नई चीज़ें सीखने के लिए तत्पर रहना”। इससे उनकी ज़िंदगी थोड़ी आसान हो जाएगी। क्योंकि नई चीज़ों से सामना होना तो शिक्षा के क्षेत्र में अब बड़ी पुरानी बात हो गई है। समय के साथ पढ़ाने का तरीका, बच्चों को देखने का नज़रिया, किताबें और बहुत कुछ बदल रहा है। बदलते दौर में नई चीज़ों से आप ख़ुद को बहुत ज्यादा देर तक बचाकर नहीं रख सकते। ऐसे में बेहतर होगा कि नई चीज़ें सीखने के लिए खुद को बच्चों की तरह तैयार रखें।

इसके अलावा और भी बातें शिक्षक बच्चों से सीख सकते हैं। लेकिन उसकी चर्चा फिर किसी और पोस्ट में। अभी के लिए तो बस इतना ही। आपने इस पोस्ट को आखिरी लाइन तक पढ़ने का प्रयास किया। इसके लिए मेरी ओर से आपका बहुत-बहुत शुक्रिया।

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