Advertisements
News Ticker

जानलेवा शिक्षाः माता-पिता की महत्वाकांक्षाएं बच्चों की जान ले रही हैं?

education-mirrorआईआईटी जैसी उच्च शिक्षण संस्थाओं में पढ़ने का सपना देखने वाले छात्रों की ज़िंदगी में काफी तनाव होता है। 11वीं में प्रवेश के बाद से ही कोचिंग शुरु हो जाती है। उनके ऊपर बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव अभिभावकों की तरफ से होता है। उनको इस तरीके से प्रशिक्षित किया जाता है कि वे अपने वर्तमान प्रदर्शन से कभी संतुष्ट नहीं होते। ऐसे में परीक्षा के परिणाम अगर मन के अनुरूप न हों तो हताशा में छात्र आत्महत्या जैसा क़दम उठा लेते हैं।

हाल ही में जेईई (ज्वाइन इंट्रेस एग्जाम) मेंस का रिजल्ट आने के एक दिन बाद आईआईटी में प्रवेश के लिए तैयारी करने वाली 17 वर्षीय छात्रा ने कोटा में बिल्डिंग के पांचवे फ्लोर से छलांग लगा दी। अपने सुसाइड नोट में इस छात्रा ने लिखा, “वह अपने परिणाम से संतुष्ट नहीं है, इसलिए ऐसा क़दम उठा रही है।” पड़ोसियों ने इस छात्रा के बारे में बताया कि वह कोचिंग के अलावा अपने घर से बहुत कम बाहर निकलती थी। वह हमेशा अपने पढ़ाई में व्यस्त रहती थी।

इस आत्महत्या की वजह क्या है?

पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक अपने सुसाइड नोट में कीर्ति नाम की इस छात्रा ने लिखा है, “वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई नहीं करना चाहती थी, बल्कि बीएससी करना चाहती थी। उसका सपना आकाशीय नक्षत्रों का अध्ययन करने वाला भौतिक विज्ञानी (ऐस्ट्रोफिज़िसिस्ट) था। अपने इस सुसाइड नोट में कीर्ति ने अपने माता-पिता से माफी मांगी।”

असली माफी तो माता-पिता को अपने बच्चों से मांगनी चाहिए क्योंकि वे अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बच्चों को बेहद तनावभरी ज़िंदगी जीने के लिए मजबूर कर रहे हैं। अगर किसी बच्चे का सपना भौतिक विज्ञान में या संगीत में कुछ बेहतर करने का है तो उसे मौका मिलना चाहिए। मगर यह बात जितनी सीधी है, पारिवारिक माहौल में यह मसला उतना ही ज्यादा पेचीदा होता है। छात्रों की पढ़ाई का खर्चा अभिभावक देते हैं, इसलिए उनके आगे छात्रों की एक नहीं चलती। जबकि होना तो यही चाहिए कि बच्चों की राय को सबसे पहली प्राथमिकता दी जाये।

जानलेवा महत्वाकांक्षा

महत्वाकांक्षाओं की अंधी दौड़ बच्चों के जीवन में जहर भर रही है। उन्हें जीवन से विमुख होने के लिए मजबूर कर रही है। जिन माता-पिता को हर हाल में बच्चों के साथ खड़ा होना चाहिए, जब वे ही बच्चों के ऊपर दबाव बनाते हैं। तो ऐसे में छात्रों की मनःस्थिति पर विपरीत असर ही पड़ता है।

बुधवार को जारी परिणामों में कट ऑफ मार्क 100 थे, जबकि इस छात्रा को 144 नंबर मिले। कोचिंग संचालकों का कहना है कि यह नंबर एक सम्मानजनक नंबर था और उसके पास आईआईटी में प्रवेश मिलने की संभावना बहुत ज्यादा था। इस छात्र के 12वीं का परीक्षा परिणाम अभी जारी नहीं हुए हैं। पहले बच्चों को 12वीं की पढ़ाई करने के बाद आईआईटी की तैयारी के लिए काफी मौके मिलते थे। मगर बाद में एक फ़ैसले के तरह आईआईटी में प्रवेश के लिए उम्र और अवसरों की संख्या सीमित कर दी गई।

इससे बच्चों और अभिभावकों के ऊपर अतिरिक्त दबाव बना। ऐसे में 12वीं की परीक्षा पास होने के पहले ही बच्चों के ऊपर बेहतर प्रदर्शन का दबान बनना शुरू हो जाता है। 12वीं के बोर्ड एक्जाम और आईआईटी की प्रवेश परीक्षा दोनों के तनाव का सामना छात्रों को करना पड़ता है। इस तनाव को कम करने की पहल किसी भी तरफ से होती नहीं दिखाई देती है।

एक बात बार-बार कही जाती है कि बच्चों को अपने पसंद की पढ़ाई करने, पसंद का करियर चुनने और जीवन में चुनाव करने की आज़ादी होनी चाहिए। मगर इसकी पहल तो अभिभावकों की तरफ से होनी चाहिए। शिक्षकों की तरफ से होनी चाहिए। ताकि बच्चे आत्मनिर्भर हो सकें और अपने परिणामों के लिए खुद मानसिक तौर पर तैयार हो सकें। ख़ुशी-ख़ुशी असफलताओं का सामना करना सीख सकें। हार को गले लगाना और उससे सबक लेकर आगे बढ़ना सीख सकें। इसके अभाव में तो ‘जानलेवा शिक्षा’ का दुष्चक्र जारी रहेगा।

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: