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‘स्वतंत्र पाठक’ के मायने क्या हैं?

बच्चे, पढ़ना सीखना, बच्चे का शब्द भण्डार कैसे बनता हैरीडिंग रिसर्च की शब्दावली में एक शब्द कि जिक्र बार-बार आता है कि बच्चे को ‘स्वतंत्र पाठक’ होना चाहिए। स्वतंत्र पाठक का अर्थ है कि कोई बच्चा जो अपनी उम्र, कक्षा व पठन स्तर वाली किताबों को बिना किसी शिक्षक की मदद के आसानी से समझते हुए पढ़ पाए। इसके साथ ही अपनी रुचि के अनरूप किताबों का चुनाव कर पाए। पढ़ने का आनंद ले पाए। पढ़ने के मामले में इस तरह की स्वतंत्रता हासिल करने वाले बच्चे को ‘स्वतंत्र पाठक’ कहते हैं। स्वतंत्र पाठक की खूबी है उन्नत पठन कौशल और पढ़ने की आदत।

‘स्वतंत्र पठन’ का महत्व

इस स्तर तक पहुंचने के लिए बच्चों को स्वतंत्र रूप से पढ़ने का ढेर सारा मौका मिलना चाहिए। इस तरह की गतिविधि को ‘स्वतंत्र पठन‘ कहते हैं। स्वतंत्र पठन में बच्चा किताबों का चुनाव अपनी पसंद व रुचि के अनुसार करता है। वह पढ़ने के दौरान डिकोडिंग व समझने के कौशलों का इस्तेमाल करता है। किसी बच्चे को स्वतंत्र पठन का जितना ज्यादा मौका मिलता है उसका पठन कौशल उतना ही उन्नत होता जाता है। स्वतंत्र पठन के लिए जिन किताबों का चुनाव किया जाता है, वे बच्चे के पठन स्तर के अनुरूप ही होनी चाहिए।

उद्देश्य

अगर किताबों का स्तर बच्चे के पठन स्तर से कम है तो स्वतंत्र पठन का मकसद पूरा नहीं होगा। क्योंकि इसका प्रमुख उद्देश्य है कि बच्चे ने खुद में जिन पठन कौशलों का विकास भाषा के कालांश, मुखर वाचन, सह-पठन व जोड़ों में पठन के दौरान किया है, उसका इस्तेमाल स्वतंत्र रूप से पढ़ते हुए कर पाए। इस दौराना पुस्तकालय कालांश में शिक्षक की मौजूदगी जरूरी है ताकि वे बच्चों को पढ़ते हुए सुने और देख पाएं कि वे पढ़ने की रणनीतियों का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं?

स्वतंत्र पठन की गतिविधि वह आधार तैयार करती है जो बच्चों को आजीवन पाठक (life long reader) बनाने की दिशा में ले जाती है। ऐसी स्थिति में वह केवल स्कूली समय के दौरान पढ़ने वाला पाठक (school time reader) नहीं रह जाता।

प्रमुख गतिविधियांः

बच्चों ने कौन सी किताब पढ़ी। इसके बारे में पूछना और किताब पर चर्चा करना।
कहानी के किसी महत्वपूर्ण पात्र का चित्र बनाने के लिए कहना।
कोई अन्य व्यक्ति वह किताब क्यों पढ़े, इस सवाल का जवाब बताने के लिए कहना।
किताब में आने वाले नए शब्दों की सूची बनाने और उसके अर्थ खोजने के लिए देना।
किताब के मुख्य विचार को चिन्हित करने के लिए कहना।
लेखक या कहानी के किसी एक पात्र से पूछे जाने वाला कोई एक सवाल लिखना।

स्वतंत्र पठन से किसी बच्चे में धारा-प्रवाह तरीके से पढ़ने का कौशल विकसित होता है। इसके साथ ही बच्चे का शब्द भण्डार भी बढ़ता है। स्वतंत्र पठन के दौरान बच्चे में किसी विषय से जुड़ी आधारभूत समझ (या बैकग्राउण्ड नॉलेज) का विकास होता है। इसे रीडिंग रिसर्च की भाषा में ‘स्कीमा’ भी कहते हैं।

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