Advertisements

कब खत्म होगा शिक्षा में भेदभाव?

ashish-aleksei

इस रिपोर्ट के लेखक आशीष और एलेक्सी हैं। शिक्षा में भेदभाव समाप्त करने की कोशिशों में तेज़ी लाने की जरूरत को रेखांकित करती है यह रिपोर्ट।

रायबरेली के आशीष सिंह और इंग्लॅण्ड के एलेक्सी ओपकिक (वर्तमान में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में अध्ययनरत) ने भारतीय समाज के कुछ एक पहलुओं को समझने की कोशिश की है।

मानवाधिकार पर काम करने वाली अंतर्राष्ट्रीय संस्था हयूमन राइट्स वॉच की सन 2015 में आयी रिपोर्ट “मिलियंस ऑफ़ इंडियन चिल्ड्रन डिनाइड स्कूल एजुकेशन ड्यू टू डिस्क्रिमिनेशन” (“भेदभाव के कारन शिक्षा से वंचित लाखों भारतीय बच्चे”) भारत में व्याप्त विषमता और उससे होने वाली मुश्किलों पर प्रकाश  डालती है।

जातिगत भेदभाव की चुनौती

यह रिपोर्ट बताती है कि पटना की दस साल की मुसहर लड़की मधु को जाति के कारण स्कूल से निकाल दिया गया. इस घटना का संज्ञान लेते हुए “राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग” ने मधु समेत पचास अन्य दलित बच्चों को पड़ोस के सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलवाया।

रिपोर्ट आगे कहती है कि सरकार द्वारा केवल यह सुनिश्चित करना कि सभी को शिक्षा मिल सके पर्याप्त नहीं है। वंचित समुदायों से आने वाले बच्चों को स्कूल में रखने और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा देने के प्रयास किये जाने चाहिए।

शिक्षा का अधिकार कानून के बनने और मिड-डे मील योजना के लागू होने के बाद भी बीच में ही पढ़ाई छोड़ देने वाले बच्चों की संख्या बहुत ज्यादा है। लगभग दो तिहाई बच्चे प्राथमिक शिक्षा पूरी होने से पहले ही स्कूल छोड़ देते हैं।

बच्चे जो पढ़ाई छोड़ देते हैं

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ भारत में हर साल अलग-अलग कारणों से तकरीबन 8 करोड़ बच्चे स्कूल नहीं जाते। वहीं बहुत से बच्चे अपनी प्राथमिक स्तरर की पढाई पूरी नहीं कर पाते हैं.

भारत सरकार एक नयी शिक्षा नीति लाने का प्रयास कर रही है जिसमे वंचित समुदाय के बच्चों के लिए विशेष प्रावधान किये जायेंगे। मगर इसमें किसी समुचित मॉनिटरिंग मेकनिज़्म का न होना भी एक अन्य चिंताजनक तथ्य है।

शिक्षा में शून्य भेदभाव का लक्ष्य

education mirror, primary education in indiaयह रिपोर्ट शिक्षा में शून्य-भेदभाव की बात करती है। नई शिक्षा नीति में दिव्यांग बच्चों पर और ज़्यादा ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है, शिक्षा का उद्देश्य लर्निंग ऑउटकम तक ही सीमित नहीं होना चाहिए।

सरकार को सभी को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करने के लिए सतत प्रयास करने की जरुरत है. ताकि मधु जैसे तमाम बच्चे अपने सपनो को साकार कर सकें।

आशीष और एलेक्सी का कहना है कि इस समय भारत में युवाओं की संख्या ज़्यादा है जो भविष्य में एक नए आयुवर्ग में प्रवेश करेंगे, जिसके कुछ अन्य आयाम और चुनौतियाँ होंगी। ऐसे में उन चुनौतियों के समाधान पर ध्यान देने की जरूरत आने वाले समय में भी बनी रहेगी।

(इस रिपोर्ट के लेखक आशीष और एलेक्सी हैं। उन्होंने एजुकेशन मिरर के पाठकों के लिए यह रिपोर्ट लिखी है। ताकि शिक्षा में भेदभाव से जुड़े मुद्दों पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया जा सके।)

Advertisements

Leave a Reply