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टेक्नोलॉजीः क्लासरूम में कैसे पहुंचे जंगल के जानवर?

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प्राथमिक विद्यालय भैंसी खतौली, मुज़फ्फरनगर से अपने क्लासरूम की यह तस्वीर शिक्षिका रीना मलिक ने साझा की है।

शिक्षा के क्षेत्र में टेक्नोलॉजी की भूमिका को रचनात्मक तरीके से इस्तेमाल करने में उत्तर प्रदेश के शिक्षक भी पीछे नहीं हैं। वे नित नये प्रयोगों के जरिये कक्षा-कक्ष में बच्चों के अनुभवों को संपन्न बनाने के प्रयास कर रहे हैं। इस कड़ी में एक नया विचार है ZooKazam app के इस्तेमाल का। यह एप मुफ्त है, जिसे कोई भी शिक्षक मोबाइल पर डाउनलोड करके क्लासरूम में इस्तेमाल कर सकते हैं।

इस एप के माध्यम से उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक साथी बच्चों को जानवरों की थ्री-डी छवियां क्लासरूम में मोबाइल के माध्यम से दिखा रहे हैं। इससे जुड़े अनुभवों को जब शिक्षकों ने फ़ेसबुक पर शेयर किया तो बाकी शिक्षकों ने भी जानने की जिज्ञासा जताई कि क्लासरूम में ऐसा कमाल कैसे संभव हुआ?

किताबों से बाहर आकर बच्चों से मिले जानवर

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शिक्षिका रीना मलिक ने क्लासरूम में टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के अनुभव साझा किये।

इस एप के माध्यम से आप चींटी जैसे छोटे से जानवर से लेकर जुरासिक काल के बड़े जानवरों की छवियों को क्लासरूम में दिखा सकते हैं। इस एजुकेशनल एप को एवार्ड भी मिल चुका है। इस एप के सीईओ मार्जन यावरी कहते हैं कि यह एप जीव जगत के बारे में ज्ञान व समझ को साझा करने की दृष्टि से काफी उपयोगी है।

‘मैम ये जानवर तो तो सच में आ गए’

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बच्चों को अपने शिक्षक का यह प्रयोग काफी पसंद आया।

इस एप के माध्यम से ध्रुवीय भालू, सफेद शार्क, घोड़े, हिरन जैसे बहुत से जानवरों और पक्षियों की छवियों को क्लासरूम में उकेरा जा सकता है। बच्चे इस दौरान भरपूर आनंद उठाते हैं और अपनी जिज्ञासा को शांत करते हैं। इस एप के अपने क्लासरूम में प्रदर्शन के अनुभवों को फ़ेसबुक पर साझा करते हुए शिक्षिका रीना मलिक कहती हैं, “बच्चों की प्रतिक्रिया थी, मैम ये तो सच में आ गए।”

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एजुकेशन से जुड़े एप के बारे में शिक्षिका रीना मलिक अन्य शिक्षकों को भी जागरूक कर रही हैं।

इस एप का ट्युटोरियल देखकर शिक्षकों द्वारा कक्षा-कक्ष में इसका इस्तेमाल करना, एक सराहनीय प्रयास है। इसके बारे में अन्य शिक्षकों से अपने अनुभव साझा करते हुए रीना मलिक कहती हैं, “पहले जानवरों की छवियों को रंगीन सतह पर बनाएं और उसके बाद उनको धीरे-धीरे जहाँ भी ले जाना चाहते हैं उस तरफ ले जाएं। इसी नाम के कई सारे एप हैं, जिनके माध्यम से क्लासरूम में ऐसा किया जा सकता है।”

यह तस्वीर ट्विटर पर शिक्षिका नम्रता वर्मा ने शेयर की है, जिसमें बच्चों के चेहरे पर हैरानी का भाव साफ-साफ पढ़ा जा सकता है। वे लिखती हैं, “P.S. Unasi Bareily-Lil kids of class 1 & 2 experiencing d real wildlife in classroom…felt so excited inside d class..my 3D ICT based class.”

शिक्षकों के बीच हो रही है ‘पियर लर्निंग’

शिक्षकों द्वारा सोशल मीडिया का इस्तेमाल एक-दूसरे से सीखने और एक-दूसरे की मदद के लिए करने वाले ऐसे प्रयास आने वाले दिनों के लिए एक अच्छा संकेत हैं। जो शिक्षकों को आपस में जुड़ने और अन्य विद्यालय में नवाचार करने वाले शिक्षकों के अनुभवों से रूबरू कराने का जरिया बन रहे हैं। आप भी अपने मोबाइल के एप स्टोर में जाकर इस एप को डाउनलोड कर सकते हैं और अपने आसपास मौजूद किसी शिक्षक साथी से उसे इस्तेमाल करने का अनुभव हासिल कर सकते हैं।

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