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लिट्रेसी हीरोज़-2: बालवाड़ी के माध्यम से 50 हज़ार बच्चों के जीवन को प्रभावित कर रही हैं शिक्षिका संगीता ताई

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हम अक्सर ख़बरों में पढ़ते हैं देश के विभिन्न राज्यों में बालवाड़ी की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। हम यह भी जानते हैं कि पूर्व-प्राथमिक शिक्षा बच्चे के भावी जीवन की बुनियाद का निर्माण करती है, इसलिए इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है। इस जानने और मानने वाली स्थिति के बीच एक ऐसी बालवाड़ी भी है जिसे देखने के लिए हज़ारों की संख्या में शिक्षक पहुंच रहे हैं ताकि वहां से कुछ सीख सकें और उसे अपने-अपने स्कूलों में लागू कर सकें। इस कहानी की मुख्य किरदार हैं, दाभोण की एक शिक्षिका संगीता ताई। महिला दिवस के मौके पर एजुकेशन मिरर के लिट्रेसी हीरोज़ की दूसरी किश्त में पढ़िए उनकी कहानी।

अक्सर कुछ लोग अपना काम करने में व्यस्त रहते हैं। लोकप्रियता से ज्यादा लगाव नहीं रखते। सच्चे दिल से और निर्मल मन से ऐसे लोग बस अपना काम करते रहते है। इसी की जीवंत उदाहरण हैं, संगीता ठेमका। जो इस देश के सभी बालवाड़ी शिक्षिक-शिक्षिकाओं के लिये एक अनुुकरणीय उदाहरण हैं। उनकी बालवाड़ी के बच्चे उन्हे प्यार से ‘ताई’ कहकर बुलाते है। वे जिस क्षेत्र में काम करती हैं, वह जंगल इलाके मे बसा हुआ एक गाँव है, जो आज भी भौतिक विकास के तमाम पैमानों से कोसों दूर है। इस गाँव मे कातकरी-वारली-मल्हार कोली आदि आदिवासी जनजाती के लोग रहते हैं।

आँगनवाड़ी में होती है आनंददायी और गतिविधि आधारित शिक्षण

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इसी वनवासी बहुल गाँव मे ग्राममंगल संस्था के द्वारा स्थापित ‘ममता बालवाड़ी’ बनी हुई है। संगीता ताई पिछले 30 साल से इस बालवाड़ी मे शिक्षिका के रूप प्रतिबद्धता के साथ अपना कर्तव्य निभा रही है। दाभोण गाँव के सभी बच्चों के भीतर शिक्षा मे रुचि जागृत करने का दायित्व बड़ी जिम्मेदारी के साथ निभा रही हैं। आज भी वे अपना हर काम बडी तत्परता एवं उत्साह से करती हैं। बालवाड़ी मे दिया जाने वाले शिक्षा का एक आदर्श मॉडल के बतौर उनकी बालवाड़ी को देखा जाता है। वे पद्मश्री अनुताई वाघ को अपनी प्रेरणा मानती है और उनके पथ पर चलने को अपना सौभाग्य मानती है।

3-6 साल के बच्चों के साथ काम कैसे करें?

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इस बालवाड़ी में शिक्षण के तौर-तरीके को देखने, जानने और समझने के लिए दुनिया के विभिन्न हिस्सों से अनेक शिक्षक, आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, सरकारी अधिकारी अक्सर विज़िट करते हैं। पिछले दो सालों में पालघर ज़िले से लगभग 3000 आँगनबाड़ी सेविका और सहायकों ने संगीता ताई के अनुभव का लाभ उठाया है। बच्चों के साथ काम करने की उनकी आत्मीयता और बालवाड़ी में में होने वाली गतिविधियों को देखकर लोग खुद को प्रभावित होने से नहीं रोक पाते हैं। 3-6 साल के बच्चों के साथ कैसे काम किया जाता है, इसका प्रत्यक्ष नजारा उनकी बालवाड़ी में दिखाई देता है।

आनंददायी और गतिविधि आधारित शिक्षण की तकनीक सीखने के लिए शिक्षक उनसे प्रशिक्षण पाने के लिए आते हैं। उनसे प्रेरित होकर लगभग 2000 आँगनबाड़ी सेविका पालघर ज़िले में 50,000 से ज्यादा बच्चों तक अपने अनुभवों को पहुंचाने में सफलता हासिल कर रही हैं।

बालवाड़ी विभाग की प्रमुख हैं संगीता ताई

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आज संगीता ताई बालवाड़ी शिक्षिका के साथ-साथ बालवाडी विभाग प्रमुख के तौर पर ग्राममंगल संस्था द्वारा स्थापित सभी बालवाड़ी का संचालन करती हैं। महाराष्ट्र के 5,000 से भी ज्यादा शिक्षक एवं आँगनवाड़ी सेविका प्रशिक्षण मे प्रशिक्षक की भूमिका सक्रियता के साथ निभा रही हैं। एक छोटे से गाँव मे रह कर, एक छोटी सी बालवाडी चलाकर पुरे महाराष्ट्र के कोने-कोने में ग्राममंगल शिक्षा पद्धती को पहुंचाने का महत्वपूर्ण काम संगीता ताई पिछले 30 सालों से जिस प्रतिबद्धता के साथ कर रही हैं, वह अन्य शिक्षकों को प्रेरित करने वाला है।

महाराष्ट्र में पिछले 35 साल से पालघर जिले के डहाणू क्षेत्र में ग्राममंगल संस्था काम कर रही है। महान शिक्षाविद् गिजुभाई बधेका एवं बालशिक्षाविद पद्म विभूषण ताराबाई मोडक से प्रेरणा लेकर पद्मश्री अनुताई वाघ एवं प्रा. रमेश पानसे ने ग्राममंगल संस्था को स्थापित किया। शास्त्रीय रूप से बालवाडी के स्तर पर शिक्षा को सहज और सरल रूप देकर, उसे समाज के हर एक तबके तक पहुंचाने का कार्य यह संस्था कर रही है।

बालवाड़ी के शिक्षण में बदलाव के लिए प्रयासरत है ‘ग्राममंगल’ संस्था

ग्राममंगल के माध्यम से आज महाराष्ट्र राज्य के पालघर जिले में लगभग 2000 आँगनवाड़ी सेविका इस शिक्षा नीति को अपना रही हैं और 50,000 से भी ज्यादा ग्रामीण और आदिवासी अंचल के बच्चे इससे लाभान्वित हो रहे हैं। बालवाडी स्तर पर शिक्षा नीति मे सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में ग्राममंगल संस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

आज ग्राममंगल संस्था की विशेषता, इस संस्था की सफलता इसी बात मे छुपी हुई है। इस संस्था में पिछले पच्चीस साल से भी अधिक दिनो से काम करनेवाले लोग हैं, ऐसे ही लोग इस संस्था के स्तंभ है. जिनके भरोसे, जिनके बलबुते यह संस्था बालवाड़ी स्तर पर शिक्षा व्यवस्था मे क्रांतिकारी बदलाव लाने का सपना देख रही है।

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Ulka

संगीताताई आप हमारी प्रेरणा हैं . आपका आदिवासी इलाके में निष्ठा से जो काम चल रहा है वह सराहनिय है.आपको बहूत बहूत बधाइयाॅ हो .

संतोष

देश के सभी शिक्षकों के लिए प्रेरणा के योग्य हैं । इनके शिक्षा पद्धति से मैं खुश हूँ । तारीफ के काबिल अवश्य है ।

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