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भारत में शिक्षा क्षेत्र के लिए कैसा रहा साल 2018?

20180613_1205421555977954.jpgभारत के लिए साल 2018 का साल शिक्षा क्षेत्र के लिए नई शिक्षा के इंतज़ार वाले साल के रूप में जाना जायेगा। नई शिक्षा नीति – 2018 का इंतज़ार जारी रहा, इसको लेकर चर्चा होती रही है कि अगले दो महीने में आ रही है। लेकिन वह महीना अभी तक आया नहीं है, इसको लेकन बीच-बीच में विवाद भी होते रहे कि सरकार शिक्षा को लेकर क्या करना चाहती है, इसको लेकर जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।

क्या 2019 में आयेगी ‘नई शिक्षा नीति’

यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब नये साल 2019 में मिलेगा, ऐसा प्रतीत होता है। क्योंकि नई शिक्षा नीति का पहला ड्राफ्ट भी अभी जारी नहीं हुआ है। इस सिलसिले में प्रकाशित खबरों के शीर्षक इंतजार लंबा होने की कहानी कहते हैं। 15 दिसंबर 2018 को प्रकाशित एक समाचार में कहा गया कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मसौदा तैयार कर रही समिति ने अपना काम पूरा कर लिया है और इस मसौदे को कभी भी केंद्र सरकार को सौंपा जा सकता है। नई शिक्षा नीति का प्रारूप तैयार करने के लिए इसरो के पूर्व अध्यक्ष के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया, इसका कार्यकाल 15 दिसंबर 2018 को समाप्त हो रहा था, क्या इसे आगे बढ़ाया जायेगा, यह सवाल भी चर्चा के केंद्र में है।

आधार कार्ड के अभाव में दाखिले से इंकार नहीं कर सकते स्कूल

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने साल 2018 के सितंबर महीने में कहा कि स्कूल आधार कार्ड के अभाव में बच्चों को दाखिला देने से इंकार नहीं कर सकते हैं और ऐसा करना अवैध करार दिया जाएगा। आधार कार्ड से लिंक होने के कारण छात्रों के नामांकन दो जगह होने वाली स्थिति में कमी आई है, इसको आधार कार्ड के एक लाभ के रूप में देखा जा रहा है। इस फैसले का शिक्षा के क्षेत्र में स्वागत किया गया कि बच्चों को प्रवेश व शिक्षा के अधिकार से वंचित न किया जाए।

उत्तर प्रदेश में खुले सरकारी ‘इंग्लिश मीडियम स्कूल’

साल 2018 के अप्रैल महीने से शुरू होने वाले नये शिक्षा सत्र में उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों में से कुछ स्कूलों को इंग्लिश मीडियम स्कूल के रूप में संचालित करने का निर्णय लिया गया। इसका फायदा इस स्कूल के बच्चों को पर्याप्त शिक्षक और शिक्षा के प्रति ज्यादा ध्यान देने के रूप में मिला। कुछ जगहों पर अच्छा काम हुआ है, पर इस रणनीति को विफल बताने वाली खबरें भी मीडिया में प्रकाशित हो रही हैं कि स्कूल को इंग्लिश मीडियम है, लेकिन पढ़ाई का माध्यम तो हिंदी है। ऐसी खबरों को छापते समय शायद स्थानीय परिवेश और बच्चों के घर की भाषा को स्कूल में महत्व देने वाले पहलू को अनदेखा किया जाता है। अगर बच्चे हिंदी भाषा में किसी सामग्री को अच्छे से समझ पा रहे हैं तो शिक्षक के लिए उसका इस्तेमाल करना एक जरूरत बन जाता है। अगर बच्चे किसी सामग्री को अंग्रेजी भाषा में नहीं समझ पा रहे हैं तो केवल खानापूर्ति के लिए होने वाली पढ़ाई सिर्फ एक दिखावा साबित होगी, उसका कोई वास्तविक लाभ बच्चों को नहीं मिलेगा।

शिक्षकों द्वारा ‘पुरानी पेंशन’ की माँग

साल 2018 में शिक्षा के क्षेत्र में टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को बढ़ावा (स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी इत्यादि) देने वाली ख़बरे विभिन्न राज्यों से मिलती रहीं। शिक्षकों द्वारा ह्वाट्सऐप के माध्यम से ‘लर्निंग मैटेरियल’ साझा करने और आपस में संवाद करने का रुझान बढ़ा है। यह एक सकारात्मक विकास है। शिक्षकों द्वारा ‘पुरानी पेंशन’ की माँग भी साल 2018 में सुर्खियों में रही। इसके लिए शिक्षकों ने दिल्ली में जाकर विरोध का प्रदर्शन भी किया। वे नई पेंशन स्कीम से सहमत नहीं हैं, उनको लगता है कि बुढ़ापे का यही एक सहारा है, अगर यह भी छिन गया तो सरकारी स्कूल में लंबी सेवा देने का क्या फायदा है? सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से शिक्षकों द्वारा उठाया जाने वाला यह सवाल वाजिब भी है।

शिक्षा क्षेत्र में भर्तियों की राह देखते युवा

विभिन्न राज्यों में शिक्षकों के बहुत से पद खाली पड़े हैं। लेकिन उन पदों को भरने की प्रक्रिया बहुत धीमी रफ्तार से चल रही है। उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती और विवाद दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। हाल ही में होने वाली 68,500 की भर्ती की भी सीबीआई जाँच चल रही है, इसलिए नियुक्ति पाने वाले शिक्षक फिर से आवेदन कर रहे हैं ताकि इस विवाद की छाया से बाहर निकल सकें। यूपी टीईटी-2018 परीक्षा के सवालों को लेकर भी विवाद सामने आया, इसके बाद मामला कोर्ट में चला गया था। उत्तर प्रदेश में नई भर्ती की प्रक्रिया जारी है, जिसके संपन्न होने की उम्मीद नये साल 2019 में ही है। उत्तर प्रदेश में शिक्षा मित्रों के सामने अभी भी असमंजस की स्थिति है कि जो टीईटी-2018 पास नहीं कर पाए, उनका भविष्य क्या होगा? अभ्यर्थी अभी भी असमंजस की स्थिति का सामना कर रहे हैं कि आखिरी लम्हों में क्या बदल जाये, कुछ कहना मुश्किल है। वहीं मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती के नये सिरे शुरू होने की उम्मीद सरकार बदलने के बाद से लगाई जा रही है।

साल 2018 की और भी ख़बरें हैं जो चर्चा में रहीं। इसकी चर्चा हम अगली पोस्ट में करेंगे।

 

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