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विज्ञान शिक्षणः पदार्थ और पदार्थ के समूह

stages-of-matterजैतून जिया उत्तर प्रदेश में विज्ञान शिक्षण को रोचक बनाने की पहल कर रही हैं। इस सिलसिले में वे विज्ञान विषय के विभिन्न टॉपिक को कविताओं के माध्यम से अभिव्यक्त करने की कोशिश कर रही हैं। भारत में विज्ञान शिक्षण की एक परंपरा रटने और याद करने की रही है। विज्ञान के कालांश में में चीज़ों को समझने-समझाने की कोशिश महत्वपूर्ण है ताकि बच्चों की रूचि इस विषय में बढ़ सके।

अगर आपके मन में विज्ञान को रोचक कैसे बनाएं? ऐसे सवाल आते हैं या फिर इस सवाल के जवाब आते हैं तो आप भी एजुकेशन मिरर के विज्ञान शिक्षण कॉलम में अपने अनुभव शेयर कर सकते हैं।

कक्षा -6, पाठ -2

“पदार्थ एवं पदार्थ के समूह

होता है यह क्या पदार्थ ?
बोल उठा कक्षा में सार्थ.
सब लगे देखने उसकी ओर
कक्षा में मच गया था शोर.
गुरु जी ने सबको शांत कराया
बाहर से सामान मंगाया.

नन्ही काजल दौड़ के आई
खुरपा, गिलास, बर्फ थी लाई.
गुरु जी बोले आओ सार्थ
समझें मिल कर हम पदार्थ !
बच्चे दौड़ के पास में आये
गुरु जी फिर लगे बताये….
देखो भैय्या भार है जिसमे
और जो घेरे स्थान.

ममता बोली वो तो है सबमे
जैसे लोहा, लकड़ी, मकान !

गुरु जी बोले….
ज्ञानेन्द्रियों से हो एहसास
जो कुछ हो सब आस पास
पदार्थ उसे हम कहते हैँ
जिससे घिरे हम रहते हैँ !

फिर बोला कक्षा में सार्थ
समझ गया मै क्या है पदार्थ.
जो समान काजल थी लाई
वाह सब है पदार्थ मेरे भाई.
काजल बोली बुद्धू हो तुम
वो सब तो वस्तुएं हैँ
जो पदार्थ से बनी हुई हैँ.
जैसे खुरपा ही ले लो तुम
लकड़ी, लोहे से मिल के बना है
ऐसे ही पदार्थों से मिल के
ये सारा संसार सजा है.

रामु बोला यह समझ ना आता
तीन अवस्था में पाया जाता ?
नेहा बोली ठोस, द्रव और गैस
अकल तुम्हारी है मोटी भैंस
सब बोले अरे बर्फ कहाँ गई ?

गुरु जी बोले….
ठोस से द्रव में बदल गई !
सब बच्चे अचंभित थे
मन ही मन में शंकित थे.
यह ठोस, द्रव का समझ ना आना
बर्फ का यूँ पानी बन जाना.
शंका का हुआ निराकरण
गुरु ने शुरू किया प्रकरण.

एक बर्तन में बर्फ मंगाई
बोले देखो ठोस है भाई.
ठोस की है यह पहचान
आकृति, आयतन रहे एक समान
रख दिया बर्फ को थोड़ी देर
ठोस से द्रव में पिघल गई वो
आकृति थी बदल गई
पर आयतन रहा ज्यों का त्यों.
जल को चूल्हे पर रख गर्माया
प्रयोग कर सबको दिखलाया.
द्रव का यूँ भाप बन जाना
देख मज़ा था सबको आया.

काजल बोली…
इसकी तो आकृति, आयतन दोनों अनिश्चित.
सार्थ बोला हो गए हम शिक्षित !
इस प्रकार अवस्था परिवर्तन भी
सब बच्चों को समझ में आया.

                                          ©ज़ैतून ज़िया

 

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(ज़ैतून ज़िया पिछले 5 सालों से शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही हैं। वर्तमान में आप उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में सहायक अध्यापक के रूप में उच्च प्राथमिक विद्यालय गाजू, विकास खण्ड कछौना में काम कर रही हैं। आपको लिखना और पढ़ना दोनों बेहद पसंद हैं। इसके साथ ही विज्ञान शिक्षण को रोचक बनाने के लिए विभिन्न टॉपिक को कविताओं के रूप में लिखने का प्रयास कर रही हैं। )

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