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विशाखापत्तनमः आलोचना के बाद शराब की दुकानों पर शिक्षकों की तैनाती का फैसला पलटा

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अमरीका में 4 मई से 8 मई तक ‘शिक्षक प्रोत्साहन सप्ताह’ मनाया जा रहा है। वहीं भारत में शराब से होने वाले राजस्व को बढ़ाने के लिए शराब की दुकानों को फिर से खोलने के बाद आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम से एक बेहद अज़ीब सी ख़बर आई।
इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में शराब की दुकानों के आगे जमा हुई भीड़ को नियंत्रित करने और शारीरिक दूरी बनाये रखने के लिए शिक्षकों की तैनाती की गई।

इस फैसले का विशाखापत्तनम के शिक्षक संगठनों ने काफी विरोध किया और वहां के जिला शिक्षा अधिकारी को इस संदर्भ में लिखकर फैसले को वापस लेने का अनुरोध किया था। उन्होंने इस तरह के फैसले को देखते आगामी दिनों में ड्यूटी से अनुपस्थित रहने की बात कही थी। एक शिक्षक ने कहा, “जो शिक्षक हमारे बच्चों को पढ़ाते हैं और समाज में जिनका एक सम्मानजनक स्थान है उनको शराब की दुकानों पर इस तरह तैनात करना दुर्भाग्यपूर्ण है।”

टाइम्स ऑफ इंडिया पर प्रकाशित एक ख़बर के मुताबिक़ इस फैसले की आलोचना के बाद आंध्रपद्रेश की सरकार ने विशाखापत्तनम के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लिए गए इस फैसले को पलट दिया है। इस फैसले को लेकर शिक्षक समुदाय समेत समाज के बाकी लोगों का कहना है कि इस फैसले से शिक्षकों की छवि और उनके प्रति नजरिया और नकारात्मक होगा।

वहां के जिला शिक्षा अधिकारी बी लिंगेश्वरा रेड्डी ने कहा कि सोमवार को केवल कुछ शिक्षकों को शराब की दुकानों के आगे भीड़ को नियंत्रित करने के लिए ड्यूटी पर लगाया गया था। लेकिन जिला अधिकारी के निर्देश पर हमने शिक्षकों को इन दुकानों पर भीड़ नियंत्रित करने वाले काम से हटा लिया है।”

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Jai Shekhar

शिक्षकों को जाने क्या समझ लिया गया है।यह पीड़ा भी सिर्फ शिक्षक ही समझते हैं।शेष समाज शिक्षकों के प्रति संवेदन हीन रहकर ही चल रहा है।
सारी समस्याओं की औषधि भी शिक्षक हैं, और सभी के लिए रोग भी शिक्षक ही हैं।

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