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NEP 2020 वेबिनार: ‘तकनीक का इस्तेमाल क्षमतावर्धन व प्रभावशाली शिक्षण के लिए करें -डॉ. सर्वेन्द्र विक्रम बहादुर सिंह’

डायट सारनाथ, वाराणसी द्वारा राष्टीय शिक्षा नीति-2020 पर 14 दिवसीय वेबिनार का आयोजन किया जा रहा है। इसके सत्रों का संचालन लगातार जारी है। इस 14 दिवसीय वेबिनार का उद्घाटन एससीईआरटी, उत्तर प्रदेश एवं बेसिक शिक्षा के निदेशक डॉ. सर्वेन्द्र विक्रम बहादुर सिंह द्वारा किया गया। उन्होंने इस अवसर पर अपनी बात रखते हुए कहा, “सारे अभिभावक वो चाहे जिस वातावरण में रह रहे हों, जिस भी आर्थिक सामाजिक पृष्ठभूमि से हों उनके अंदर अपने बच्चों को पढ़ाने और उनको कुछ बनाने की इच्छा विकसित हुई है। अपनी कार्ययोजना बनाते समय राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के मुख्य उद्देश्यों और स्थानीय चुनौतियों व वास्तविकताओं का ध्यान रखें।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में फाउंडेशनल लिट्रेसी और न्युमिरेसी पर काफी ध्यान दिया गया है। इसके साथ ही साथ  3 से 6 साल के बच्चों के ‘स्कूल रेडिनेस’ पर फोकस किया जा रहा है। बच्चे धारा प्रवाह पाठक बन सके, इस बात को भी अपनी कार्य योजना के रूप में शामिल करें। लैब एरिया और स्कूल काम्पलेक्स की अवधारणा के संदर्भ में कहना है कि अगर किसी एक जगह पर अच्छी लाइब्रेरी या प्रयोगशाला है तो दूसरे स्कूल के बच्चे भी आएं वे किताबें पढ़ें और प्रयोग करके देखें। लैब एरिया के लिए स्कूलों का चुनाव करें, वहाँ पर पायलेट प्रोजेक्ट, नवाचार या असेसमेंट के माध्यम से चुने।“

‘तकनीक का इस्तेमाल क्षमतावर्धन और प्रभावशाली शिक्षण के लिए करें’

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए डॉ. सर्वेन्द्र विक्रम बहादुर सिंह ने कहा, “टेक्नोलॉजी का उपयोग शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ रहा है, आने वाले दिनों में यह और बढ़ेगा। अभी हमारे पास टेक्नोलॉजी को लेकर विकल्प बढ़ें क्योंकि स्मार्टफोन, टैबलेट और लैपटॉप के साथ-साथ इंटरनेट की पहुंच भी बढ़ी है। आमने-सामने के शिक्षण के साथ-साथ टेक्नोलॉजी के माध्यम से ऑडियो-वीडियो का इस्तेमाल शिक्षक-प्रशिक्षण और कक्षा-कक्ष में शिक्षण को प्रभावशाली बनाने की रणनीतियों पर भी चर्चा करें। डायट से जुड़े नये प्रवक्ता टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल में ज्यादा सक्रिय भागीदारी करें। आपकी क्षमता बढ़ाने का दायित्व सिखाने वाले के साथ-साथ सीखने वाले का भी है। सीखने के लिए ‘सेल्फ लर्निंग’ पर फोकस करना बेहद महत्वपूर्ण है। एक व्यक्ति में होने वाला निवेश एक संस्था में रिफलेक्ट होना चाहिए। असाइनमेंट, प्रोजेक्ट्स व असेसमेंट के लिए काम करिए, नये विचारों को क्रियान्वयन के लिए लेकर आएं। एक असेसमेंट एजेंसी के रूप में हम कैसे खुद को विकसित कर सकते हैं, इस दिशा में भी सोचें।”

शिक्षा से व्यक्ति, समाज और देश का विकास होता है – प्रो. एस. के. यादव

एनसीईआरटी के भूतपूर्व प्रोफेसर एस. के. यादव ने इस अवसर पर कहा, “शिक्षा एक ऐसा औजार है जिससे व्यक्ति, समाज और देश का विकास होता है। इसी संदर्भ में शिक्षा नीति का निर्माण किया जाता है। शिक्षा नीति बनाने का आधार हमारी तत्कालीन परिस्थिति होती है, इसके साथ ही साथ वैश्विक परिस्थितियों का भी ध्यान रखा जाता है। इसी कारण से विभिन्न अवसरों पर स्थितियों का अध्ययन करने और सुझाव देने के लिए समितियों का गठन किया जाता है।

“डायट का मुख्य उद्देश्य प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता के वैश्विक उद्देश्य को हासिल करना है। इसके लिए जिले के सभी शिक्षकों के प्रशिक्षण की जिम्मेदारी डायट की है। प्रशिक्षण के अनुरूप सामग्री का निर्माण और उपयोग करना। तीसरा काम डायट का है क्रियात्मक शोध (एक्शन रिसर्च), इसके बाद सामग्री बनाना और फिर प्रशिक्षण करना है।

1. सेवा-पूर्व प्रशिक्षण करना
2. सेवा-कालीन प्रशिक्षण करना
3. सभी डायट्स का समन्वय व आपसी सहयोग के माध्यम से काम करना

प्रत्येक डायट के संबंधित जिले में लैब की स्थापना जिले के शैक्षिक रूप से कमज़ोर क्षेत्रों में करना। ताकि सारे ब्लॉक को एक स्तर पर लाया जा सके। लैब एरिया के लिए 5-10 स्कूलों को चुनकर काम किया जा सकता है। जिला संसाधन केंद्र यूनिट का काम स्कूल से बाहर के बच्चों को शिक्षा की मु्ख्य धारा में शामिल करने का प्रयास भी किया जाता है ताकि ड्रॉप आउट बच्चों पर और अनियमित बच्चों पर ध्यान दिया जा सके। करिकुल मैटेरियल डेवेलपमेंट (CMD) यूनिट की स्थापना करना भी डायट की जिम्मेदारी है। हमारी शिक्षा का कार्य अनुभव से जुड़ाव हो, इस पर भी ध्यान देना जरूरी है। इसके लिए इंटर्नशिप जैसे प्रावधान किये गये हैं।

एजुकेशन टेक्नोलॉजी यूनिट की जिम्मेदारी है कि शिक्षकों का टेक्नोलॉजी को लेकर प्रशिक्षित किया जाये। 31 जुलाई 2020 को राष्टीय शिक्षा नीति-2020 को कैबिनेट ने अपना अनुमोदन दिया और इसके बाद से क्रियान्वयन को लेकर देशव्यापी चर्चा हो रही है। आज देश में 15 लाख से ज्यादा स्कूल हैं, इन स्कूलों के विकास में डायट की महत्वपूर्ण भूमिका है।

‘गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर है पूरा फोकस’

एनसीईआरटी के भूतपूर्व प्रोफेसर एस. के. यादव ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि सभी बच्चों की स्कूलों तक पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में पिछले वर्षों में काफी प्रगति हुई है। सबको एक समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने पर फोकस किया जा रहा है। आर्थिक रूप से शिक्षा लोगों की पहुंच में हो, इस बात का भी ध्यान रखा जा रहा है। पूर्व-प्राथमिक शिक्षा की व्यवस्था सभी स्कूलों के लिए हो, ऐसा प्रावधान राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में किया गया है। अन्य भाषाओं को सीखने में मातृभाषा की समझ मदद करती है, इसलिए मातृभाषा में पढ़ने-पढ़ाने को प्रोत्साहित किया गया है। सभी तरह के बच्चों को समान अवसर मिलें, इसका राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में विशेष तौर ध्यान रखा गया है। अध्यापक शिक्षा में कई नये बदलाव हो रहे हैं।

वर्तमान में दो साल का पाठ्यक्रम डीएलएड के तहत संचालित हो रहा है, भविष्य में यह दो साल की पढ़ाई आगे चलकर 4 साल की हो जायेगी। भविष्य में विभिन्न अवधि के बीएड वाले कोर्स (प्री पायमरी, प्रायमरी और सेकेंडरी वाले) ही संचालित होंगे। इस प्रक्रिया में अभी समय लगेगा और एनसीएफ को फिर से जब रिवाइज किया जायेगा तो चीज़ें ज्यादा स्पष्ट रूप से हमारे सामने होंगी। प्रत्येक स्कूल कॉम्पलेक्स से 10-10 स्कूल लिंक होंगे। स्कूल कॉम्पलेक्स के प्रशिक्षण का दायित्व डायट का होगा और डायट से सभी स्कूल कॉम्पलेक्स लिंक होंगे। उत्तर प्रदेश सरकार को ‘इंस्टीट्यूशनल डेवेलमेंट प्लान’ या एक्शन प्लान बनाकर देने की योजना काफी अच्छी है। इसमें विभिन्न नये बिंदुओं को समाहित किया जा सकता है, जो चर्चा के दौरान निकलकर सामने आएंगे।
डायट सारनाथ वाराणसी के अभिनव प्रयासों का भी जिक्र इस दौरान किया गया।
• ICT आधारित शिक्षण में दक्षताओं का विकास
• समय की माँग व शिक्षण प्रोफ़ेशन की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षुओं की तैयारी करना
• संस्थान में प्रशिक्षण की आवश्यकता वाले बिंदुओं की पहचान और इसके अनुसार सेवा-कालीन प्रशिक्षण का आयोजन करना
• नवाचारी शिक्षण एवं प्रशिक्षण गतिविधियों हेतु एक प्रकोष्ठ (Cell) का गठन करना।
• बाल मनोविज्ञान आधारित प्रशिक्षण हेतु अभिनव प्रयास करना
• संस्थान में विज्ञान, कंप्यूटर, भाषा शिक्षण की मॉडल प्रयोगशालाओं को स्थापित करना

‘क्रियान्वयन के लिए शिक्षा नीति के विज़न और लक्ष्य को समझना है जरूरी’

इस वेबिनार के उद्घाटन सत्र में अपनी बात रखते हुए डायट, सारनाथ, वाराणसी के प्रिंसिपल उमेश कुमार शुक्ल ने सभी वक्ताओं का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा, “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर वेबिनार का आयोजन डायट सारनाथ द्वारा किया जा रहा है। हम इतनी लंबी चर्चा इसलिए कर रहे हैं ताकि हम नई शिक्षा नीति के विज़न, लक्ष्य को समझकर इसका बेहतर क्रियान्वयन कर सकें। नई शिक्षा नीति के माध्यम से एजुकेशन सिस्टम में क्या बड़े बदलाव प्रस्तावित किये गये हैं, इसके महत्व पर विस्तार से चर्चा करते हुए समझ निर्मित करते हुए आगे बढ़ेंगे।”

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, सारनाथ, वाराणसी द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर बेहतर समझ निर्मित करने के लिए 14 दिन का वेबिनार आयोजित किया जा रहा है। जिसकी रिपोर्ट आपको एजुकेशन मिरर पर नियमित रूप से पढ़ने को मिलती रहेगी।

डायट सारनाथ के प्रिंसिपल उमेश कुमार शुक्ल ने आगे कहा, “डायट सारनाथ के प्रवक्ता 14 दिवसीय वेबिनार के दौरान नई शिक्षा नीति-2020 की अवधारणाओं को स्पष्ट करेंगे। इसके बाद इसपर चर्चा होगी। गुणवत्तापूर्ण और रुचिपूर्ण शिक्षा मुहैया कराने को लेकर नई शिक्षा नीति में क्या सुझाव दिये गयें हैं, क्या रास्ता सुझाया गया है, इसको समझना हमें अपने काम को बेहतर ढंग से करने में मदद करेगा। इस शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में प्रत्येक शिक्षक की भागीदारी सुनिश्चित है। सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में चौथा लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लक्ष्य 2030 के लिए निर्धारित किया गया है। ताकि आजीवन सीखने के अवसर सभी के लिए उपलब्ध हो सकें।

अंत में नरसिंह मौर्य, प्रवक्ता रसायन शास्त्र ने सभी पैनलिस्ट और वेबीनार में लाइव जुड़े हुए सभी शिक्षकों, विद्वानों और छात्रों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए बताया कि कल दिनांक 18-9-2020 के कार्यक्रम में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के दृष्टि पत्र एवं सिद्धांत विषय पर वेबिनार चर्चा केन्द्रित होगी।

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