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कविता: क्योंकि वे दिन प्रेम के थे

‘अपनों में नहीं रह पाने का गीत’किताब प्रभात द्वारा लिखी गई कविताओं का एक अनूठा संग्रह है। इसकी कविताएं हमें अतीत के चलचित्र की भांति गाँव में बीते बचपन के दिनों, बदलते हुए गाँवों, दरकते रिश्तों, स्त्रियों के संघर्ष व साहस के साथ-साथ प्रेम और अलगाव के विविध रंगों को खुद में समेटे हुए हैं। इस किताब का प्रकाशन साहित्य अकादमी ने किया है और यह पुस्तक राजस्थान के विभिन्न पुस्तकालयों में भी मौजूद है। प्रस्तुत है इस किताब से एक कविता जिसका शीर्षक है ‘क्योंकि वे दिन’

क्योंकि वे दिन प्रेम के थे
ग्रीष्म भी बसंत-सा सुहावना लगता था
वह साधारण लड़की
पृथ्वी पर उस लड़के के प्रेम के लिए ही
जन्मी हो ऐसी लगती थी
वह साधारण लड़का
पृथ्वी पर उस लड़की के प्रेम के लिए ही
जन्मा हो ऐसा लगता था

क्योंकि वे रातें उनके प्रेम की रातें थीं
किसी को उनके किस्से गढ़े बिना
और उनके प्रेम को लेकर गढ़े किस्सों को सुनाए बिना
नींद ही नहीं आती थी

क्योंकि वे दिन प्रेम के थे
दुर्गम रास्ते भी सुगम हो गए थे
अपमान, तिरस्कार, घृणा जैसी जानलेवा बातों के जवाब
प्रेम अपने आप ढूंढता था और दे देता था
उन दोनों को कुछ भी नहीं करना पड़ता था इस बावत
उन्हें तो बस करना था प्रेम
जो कि वे कर ही रहे थे
जिसके बिना वे रह ही नहीं सकते थे एक पल भी

क्योंकि वे प्रेम के दिन थे
वे ही दिखते थे सब ओर
बारिश में जैसे बौछारें ही बौछारें दिखती हैं सब ओर
पानी ही पानी हरियाली ही हरियाली सरगम ही सरगम हवाओं में
सुंदर से सुंदर को नष्ट होना होता है एक दिन
त्रासद आ ही जाता है गिनते हुए दिन
लड़की है अब भी वही
लड़का है अब भी वही
पर प्रेम वाला लड़का नहीं

वो प्रेम वाला लड़का
वो प्रे वाली लड़की
जाने कहाँ बिला गए धरती में
या बह गए जीवन की बाढ़ में

मगर तब नहीं बिलाए वे धरती में
तब नहीं बहे वे जीवन की बाढ़ में
क्योंकि वे दिन प्रेम के थे।

(लेखक परिचय: प्रभात जी का जन्म राजस्थान के करौली में हुआ। आपकी लिखी कहानियों, कविताओं के कई संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। बाल साहित्य में आपकी लिखी कविताएं बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। आपकी लिखी कहानी ऊंट का फूल बच्चों को बेहद पसंद आती है। आपकी लिखी कविता बंजारा नमक लाया ऊंटगाड़ी से तो बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी बेहद पसंद आती है। कुछ समय पहले प्रकाशित बिग बुक लाइटनिंग भी बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय है। आपने देश के विभिन्न हिस्से की लोककथाओं के संकलन में बड़ी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके यू-ट्यूब चैनल से जुड़ें।)

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