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दीवार पत्रिका: ‘बच्चों के आगे बढ़ने की खुशी और बिछड़ने का दुःख’

वाराणसी के चिरईगाँव ब्लॉक में स्थित प्राथमिक विद्यालय पतेरवां में पिछले सात वर्षों से बच्चों द्वारा ‘नन्हीं-उड़ान’ के नाम से एक दीवार पत्रिका निकल रही है।  बच्चों के लेखन कौशल को निखारने और उनके विचारों व अनुभवो को शब्दों के माध्यम से पत्रिका का हिस्सा बनाने की प्रक्रिया में विद्यालय की शिक्षिका वन्दना पाण्डेय अन्य साथी शिक्षकों के सहयोग से सक्रियता के साथ काम कर रही हैं।

एक शिक्षक के रूप में बच्चों को पाँच साल में सीखते, आगे बढ़ते और सफल होते हुए देखने और उनसे विदा होने का क्या असर होता है, आगे पढ़िए उन्हीं के शब्दों में।

दीवार पत्रिका का ‘विदाई विशेषांक’

इस बार विद्यालय की भित्ति बाल पत्रिका ‘नन्हीं-उड़ान’ का 21वां अंक विदाई विशेषांक’ निकालने का निश्चय मेरे और सरिता मैम द्वारा लिया गया तो हम दोनों का मन प्रसन्नता के साथ-साथ उदासी से भर गया। हमने जब बच्चों के सामने इस प्रस्ताव को रखा तो बच्चे सहर्ष तैयार हो गए। उन्होंने अपने विगत वर्षों से लेकर अब तक के सभी अनुभवों को लिखा और इस अंक को समृद्ध बनाने में अपना योगदान दिया। यह अंक इन बच्चों के सच्चे अनुभवों पर आधारित हैं। जिसको पढ़कर कभी प्रसन्नता का भाव आया तो कभी निराशा का।

नये स्कूल में जाने से पहले क्या सोचते हैं बच्चे?

बच्चों का अपने विद्यालय से दूसरे विद्यालय जाना एक मिश्रित अनुभव के रूप में सामने आया, जिसमें कुछ बच्चे उत्साहित थे, तो कुछ चिंतित भी थे। कुछ बच्चों के मन में नए स्कूल के नए माहौल,नए दोस्तों और नए शिक्षकों को लेकर भय व्याप्त था। अधिकांश बच्चे अपने पुराने स्कूल,अपने पसंदीदा अध्यापकों और दोस्तों के प्रति कृतज्ञता के भाव से भरे हुए थे।

वास्तव में किसी को विदा करना बहुत मुश्किल होता है। ‘विदा’ शब्द एक बहुत ही भारी-भरकम शब्द है। हालांकि ‘विदा करना ‘या ‘विदा होना’ दु:ख के संदर्भ में आता है, लेकिन एक शिक्षक के रूप में हम कक्षा 5 के बच्चों को विदा कर रहे हैं, उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए ताकि वे अपनी आगे की पढ़ाई जारी रखें,अपने भविष्य को संवारें और सफलता प्राप्त करें। यह विदाई- विशेषांक खुशी है उनके आगे बढ़ने की और एक दु:ख है उनके बिछड़ने का।

यह अंक हमारे दिल के बेहद करीब है

विदाई -विशेषांक’ कक्षा 5 के बच्चों द्वारा भित्ति बाल-पत्रिका ‘नन्हीं-उड़ान’ की एक ऐसी प्रस्तुति है जो हमारे हृदय के सबसे करीब है। मैं इस अंक को जब-जब देखूंगी, जब -जब पढ़ूंगी मुझे इन बच्चों के साथ बिताए हुए क्षण याद आएंगे। इन बच्चों के लिए शुभाशीष,अनेक शुभकामनाएं की वह जीवन-पथ पर आगे बढ़े, सफलता प्राप्त करें और अपने जीवन के उच्चतम लक्ष्यों को प्राप्त करें।
धन्यवाद!

साभार,
वन्दना पाण्डेय
प्रा० वि० पतेरवां, चिरईगांव, वाराणसी

(आप एजुकेशन मिरर को फ़ेसबुकएक्स और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।)

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