शिक्षा विमर्शः ‘जो बात क्लासरूम तक पहुंच जाए, वही सफल है’
किसी विचार को क्लासरूम तक ले जाना शिक्षा क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती है।
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किसी विचार को क्लासरूम तक ले जाना शिक्षा क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती है।
भयमुक्त माहौल में होने वाला संवाद शिक्षक के लिए कितना जरूरी है? बता रहे हैं जितेंद्र महला। इस पोस्ट में पढ़िए उनके अनुभव।
अगर आप भी ऐसे सवालों से दो-चार होते हैं तो पढ़िए यह पोस्ट।
स्कूलों में रचनात्मक शिक्षण की आधारभूत मान्यताओं का माखौल उड़ाया जा रहा है।
Compulsory basic education begins at the age of 7 and pre-primary education is one year earlier. In pre-primary education the emphasis is on preparation for school.
किसी भी स्कूल में भाषा की कक्षा ऐसी होनी चाहिए जहाँ भाषा अपनी संपूर्णता और सहजता के साथ मौजूद हो।
साल 2014 से समूची दुनिया का सबक यही होगा कि बच्चों के ख़िलाफ़ होने वाली बर्बर हिंसा को रोकें और स्कूल को निशाना बनाने के मंसूबों को नाकाम को पराजित करें। ताकि दुनिया के बच्चे खौफ के साए से बाहर आ सकें।
आकाशवाड़ी पर दो कार्यक्रम सुनने का मौका मिला एक का विषय था 'महिलाओं के ख़िलाफ हिंसा' और दूसरा 'साइबर क्राइम की तरफ़ युवाओं के बढ़ते आकर्षण का....दोनों कार्यक्रमों में बात अंततः बच्चों की शिक्षा पर आकर टिकी....आख़िर क्यों?
स्कूल लायब्रेरी से मनपसंद किताबें छाँटते बच्चों की ख़ुशी देखने लायक थी, जो थोड़ी देर पहले नाराजगी के कह रहे थे कि हम बची-खुची किताबें क्यों ले? अब उन्हीं बच्चों के चेहरे पर नाराजगी की जगह ख़ुशी के भाव तैर रहे थे।