शिक्षा दर्शन लेखः शिक्षा के स्वरूप का सवाल और जे. कृष्णमूर्ति जे. कृष्णमूर्ति के शब्दों में, "शिक्षा को जीवन के सवालों तथा मूल्यों को समझने में सहायता करनी चाहिए। " educationmirrors | 1 मई 2020
लायब्रेरी व्यक्ति की गतिशीलता का दमन न करें संस्थाएं- बर्गसाँ आधुनिक दर्शन के इतिहास में हेनरी बर्गसाँ (1859-1941) का महत्व इस बात में है कि वे विश्व को सतत विकासमान प्रक्रिया के रूप में देखते हैं।… 12 दिसंबर 2015
शिक्षा दर्शन रवींद्रनाथ टैगोरः ‘प्रकृति और सामाजिक संदर्भ से दूर न हो शिक्षा’ रवींद्रनाथ टैगोर भारत के पहले दार्शनिक थे जिन्होंने बच्चों का सवाल उठाया और शिक्षा में व्यापक सुधार का सुझाव दिया। उन्होंने इस सच्चाई पर अफसोस जताया… 9 मई 2015
शिक्षा दर्शन शिक्षा दर्शनः जॉन लॉक के विचार दार्शनिक जॉन लॉक मानते थे कि भाषा का सही और सहज ज्ञान उसके प्रयोग के वातावरण में ही संभव है। 2 मार्च 2015
मैं शिक्षक हूं जॉन डिवीः स्कूल समाज की आवश्यकता है दार्शनिक जॉन डिवी का मानना था कि स्कूल परिवार का ही एक विस्तार है. 6 नवंबर 2014
शिक्षा दर्शन शिक्षा दर्शनः आज भी प्रासंगिक हैं रूसो 18वीं शताब्दी के महान दार्शनिक ज्यां जाक रूसो शिक्षा में उपदेश की परंपरा के पूर्णतः ख़िलाफ़ थे. उनका बच्चों की अच्छाई में गहरा विश्वास थी. 21वीं… 5 नवंबर 2014