शिक्षा विमर्श: कोविड-19 के इस दौर में ऑनलाइन शिक्षण से जुड़े सवाल क्या हैं?
हेमन्त कुमार झा लिखते हैं, "ऑनलाइन प्रणाली ने शैक्षणिक संपर्कों को असीमित विस्तार दिया और यह इसकी सबसे महत्वपूर्ण देन है।"
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हेमन्त कुमार झा लिखते हैं, "ऑनलाइन प्रणाली ने शैक्षणिक संपर्कों को असीमित विस्तार दिया और यह इसकी सबसे महत्वपूर्ण देन है।"
साल 2017 में अब तक एजुकेशन मिरर के 5 लाख से ज्यादा हिट्स हो चुके हैं।
बहुभाषिकता एक समाधान है। इससे हम किसी मुद्दे पर अलग-अलग दृष्टिकोण से विचार कर पाते हैं। एक ऐसे समाधान तक पहुंचने का प्रयास कर पाते हैं जो अन्य लोगों के प्रति भी समान रूप से संवेदनशील होता है।
शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव का रास्ता जड़ता वाली बर्फ को पिघलाने के बाद शुरू होता है।
हर साल प्राथमिक स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों को स्कूल में 'नामांकन का एक लक्ष्य' दिया जाता है। इसे पूरा करने के लिए कम उम्र के बच्चों का भी प्रवेश पहली कक्षा में कर लिया जाता है।
ग़ौर करने वाली बात है कि शिक्षकों की सबसे ज्यादा कमी आदिवासी इलाक़ों में है।
बच्चों के रोज़ाना स्कूल आने पर काफ़ी ध्यान दिया जाता है। मगर सबसे अहम सवाल है कि क्या स्कूल आने वाले बच्चे सीखते भी हैं?
“बच्चों को हिंदी में पढ़ना सिखाना बहुत आसान काम है। लेकिन हिंदी में लिखना सिखाना काफी मुश्किल काम है।" यह कहना है एक शिक्षक का। इस पोस्ट में पढ़िए पढ़ना-लिखना सीखने से जुड़े रोचक अनुभवों के बारे में।