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शिक्षक प्रशिक्षणः योजना के अनुसार कैसे काम करें शिक्षक?

किसी योजनाबद्ध काम को देखकर शिक्षक की पहली प्रतिक्रिया होती है, “इतना करने जाऊंगा तो उलझन में पड़ जाऊंगा।” असली काम की शुरुआत इस डर को पार पाने के बाद ही होती है। बतौर शिक्षक आप किसी काम को लंबे समय से एक ख़ास तरीके से करने में सहज महसूस करते हैं।

नई आदत का विकास

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि किसी काम को ख़ास तरीके से करने की आपने आदत सी हो जाती है। किसी नये काम को हाथ में लेने का मतलब है एक नई आदत का विकास करना। शिक्षा के क्षेत्र में होने वाले शोध में बार-बार अभ्यास के ऊपर विशेष जोर दिया जाता है। ऐसा माना जाता है कि अगर किसी काम को ख़ास तरीके से बार-बार करें तो वह हमारे लिए काफी आसान हो जाता है। अंततः वह हमारे आदत का हिस्सा बन जाती है।

इसे शिक्षक प्रशिक्षण का स्किल बेस्ड अप्रोच भी कह सकते हैं। जहाँ ज्ञान या समझ वाले पहलू को जरूरत भर शामिल किया जाता है। फिर धीरे-धीरे आवश्यकता के अनुसार उसका विस्तार किया जाता है। ताकि शिक्षक नये काम के प्रति सहज रहें। उनको ऐसा न लगे कि इस काम में तो सिद्धांत बहुत ज्यादा हैं। इन बातों को तो क्लासरूम तक लेकर जाना काफी मुश्किल है। इसलिए भी शायद अभ्यास के ऊपर ज्यादा जोर दिया जाता है ताकि क्लासरूम में चीज़ों को करते समय क्या मुश्किल आ रही होगी, उसके लिए शिक्षक को तैयार किया जा सके।

योजना बनाकर काम करने में मुश्किल क्या है?

योजनाबद्ध तरीके से काम करने के दौरान आने वाली मुश्किलें क्या होती हैं? इस सवाल पर फिर से लौटते हैं। सबसे पहली मुश्किल अपना भरोसा जीतने की होती है कि यह काम हो पायेगा क्या? एक बार आपने यह भरोसा हासिल कर लिया तो फिर आगे की राह आसान हो जाती है।

  1. योजनाबद्ध तरीके से काम करते समय गतिविधियों का क्रम भूल जाते हैं,
  2. सारी गतिविधियों को पूरा करने में निर्धारित समय से ज्यादा वक्त लगता है।
  3. कुछ काम करना बाकी रह जाता है
  4. हर रोज़ होम वर्क नहीं कर पाते, क्योंकि इसकी हमें आदत नहीं होती
  5. नई चीज़ों को सीखने के कारण धीरे-धीरे चीज़ों पर हमारी पकड़ बनती है
  6. किसी गतिविधि को कैसे करना है, हम चाहते हैं कि कोई हमें बताये।
  7. हम क्लासरूम में होने वाले अनुभवों से सीखते हैं।
  8. बच्चों के आवश्यकता के अनुसार पढ़ाने के तरीके में बदलाव करते हैं।
  9. अगर इस दौरान हमें कोई बाहरी सपोर्ट और सही फीडबैक मिल रहा हो तो हमारे सीखने की रफ्तार तुलनात्मक रूप से काफी तेज़ होती है।
  10. हम अपनी रफ़्तार से सीखते हैं। यह बात जितनी बच्चों के लिए सच है, उतनी ही शिक्षकों के लिये भी। इसलिए इस बात से विचलित नहीं होना चाहिए कि हमें किसी नये काम को अच्छे से करने में समय लग रहा है।
  11. योजनाबद्ध काम करते समय कई बार ऐसे मौके आते हैं, जब हम अपना धैर्य खोने लगते हैं। हमारा मन होता है कि पुराने ढर्रे पर फिर से लौट चलें। किसी नये काम को करते समय ऐसे संक्रमण काल से हर किसी को गुजरना होता है। इसलिए इसे सीखने की प्रक्रिया का एक सामान्य सा हिस्सा मानकर चलें।
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