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सुर्खियों में शिक्षाः साल 2016 की 5 सबसे चर्चित बातें

साल 2016 में शिक्षा के क्षेत्र में अगर किसी बात ने राष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा सुर्खी बटोरी तो वह थी, नई शिक्षा नीति। लोग गूगल सर्च करके खोज रहे थे कि नई शिक्षा नीति के मसौदे में क्या है? इसको लेकर पूरे साल चर्चा होती रही कि नई शिक्षा नीति के मसौदे में क्या है, सरकार उसे सार्वजनिक क्यों नहीं करना चाहती है? क्या वह कुछ छिपाना चाहती है।

1. नई शिक्षा नीति

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सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला एक बच्चा मोर का चित्र बनाते हुए।

भारत में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा नई शिक्षा नीति-2016 के मसौदा तैयार किया जा रहा है। इसमें शिक्षा द्वारा नवाचारों को प्रोत्साहित करने की बात हो रही है। इसके साथ ही आठवीं तक पास-फेल वाली नीति पर पुर्नविचार हो रहा है।

नई शिक्षा नीति-2016 का मुख्य उद्देश्य है कि शिक्षा इंसान को बंधनों से मुक्त करे और उसे सक्षम बनाए। इसमें इस बात पर भी ध्यान दिया जा रहा है कि शिक्षा रट्टा मारने वाली परंपरा से मुक्त हो। इस विचार का जिक्र एनसीएफ-2005 के दस्तावेज़ में भी आता है। जिसमें शिक्षा को स्कूल की चारदीवारी के बाहर की दुनिया से जोड़ने की बात कही गयी है।

2. शिक्षा का बजट बढ़ा

केंद्र सरकार की द्वारा शिक्षा के बजट में कटौती की खबरों पर काफी चर्चा हुई थी कि शिक्षा का बजट क्यों काटा जा रहा है। जबकि जरूरत तो इसे बढ़ाने की है। इस साल के बजट में सरकार ने इस मुद्दे को संभालने की थोड़ी कोशिश की है। साल 2016 में शिक्षा का बजट थोड़ा सा बढ़ा। साल 2015 में यह 68,963 करोड़ था। साल 2016 के लिए 72,394 करोड़ रूपए का आवंटन किया गया है। यह बढ़ोत्तरी 4.9 फीसदी है। इस साल के बजट में 43,554 करोड़ का आवंटन स्कूली शिक्षा के लिए किया गया। पिछले साल की तुलना में तीन फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है।

बजट के बारे में एक ख़ास बात है कि यह बजट 2014-15 के बजट से 12.5 प्रतिशत कम है। साल 2014-15 में 82,771 करोड़ रूपए का आवंटन किया गया था।

3.सेकेंडरी स्तर पर नामांकन बढ़ा

स्कूल जाते बच्चे, स्कूली शिक्षामगर ग़ौर करने वाली बात है कि शिक्षा के बजट में होने वाली बढ़ोत्तरी के बाद भी लाखों बच्चे सेकेंडरी स्कूल स्तर की शिक्षा पूरी करने से पहले स्कूल छोड़ रहे हैं। सेकेंडरी स्कूल (नौवीं कक्षा) में नामांकन 48.5 प्रतिशत से बढ़कर 51.3 प्रतिशत हुआ।

जबकि हायर सेकेंडरी स्तर पर बच्चों का नामांकन साल 2015-16 में 32.3 प्रतिशत रहा। इस स्तर पर शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल के लिए काफी प्रयास हो रहे हैं।

कुछ संस्थाओं द्वारा अंग्रेजी गणित और विज्ञान विषय में तैयारी के लिए छात्र-छात्राओं को विषय को समझने में मदद की जा रही है। इसके संकेत साफ है कि आने वाले सालों में सेकेंडरी स्तर पर नामांकन के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने पर काफी ध्यान दिया जाएगा।

4. मानव संसाधन मंत्रालय का फेरबदल

मानव संसाधन विकास मंत्रालय में होने वाले फेरबदल ने भी लोगों का ध्यान खींचा। इस साल स्मृति ईरानी की जगह प्रकाश जावड़ेकर को मानव संसाधन विकास मंत्री बनाया गया। वहीं स्मृति ईरानी को कपड़ा मंत्रालय का प्रभार दिया गया। अचानक से हुए इस फैसले ने लोगों को चौंका दिया था।

5. करोड़ों बच्चे स्कूल से बाहर

इसी साल 2011 में होने वाली जनगणना के आँकड़े सार्वजनिक हुए। इसके मुताबिक इसके मुताबिक़ भारत में ऐसे बच्चों की संख्या 78 लाख है जो स्कूल तो जाते हैं मगर उनको परिवार की तरफ से काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। जबकि 8.4 करोड़ बच्चे स्कूल ही नहीं जाते।

DSCN3621उपरोक्त आँकड़े बताते हैं कि स्कूली शिक्षा में सिर्फ नामांकन बढ़ाने की तरफ ध्यान केंद्रित करने से काम नहीं चलेगा। बच्चों को ठहराव और गुणवत्ता वाली शिक्षा पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

ताकि हम सेकेंडरी स्तर की शिक्षा के लिए जमीन मुहैया करा सकें। प्राथमिक स्तर की शिक्षा को मजबूती देने के लिए बालवाड़ी पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि पहली कक्षा में आने वाले बच्चे उस कक्षा के लिए जरूरी बुनियादी तैयारी के साथ आ सकें।

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