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भाषा शिक्षणः मातृभाषा में हो पढ़ाई तो तेज़ी से सीखते हैं बच्चे

matribhasha-divasआज 21 फ़रवरी है। इस दिन को पूरी दुनिया में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है। वैश्विक स्तर पर साक्षरता के क्षेत्र में होने वाले शोध में बार-बार यह बात रेखांकित हुई है कि मातृभाषा में होने वाली पढ़ाई बच्चों के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद है।

मातृभाषा का महत्व

मातृभाषा से बच्चों का परिचय घर और परिवेश से ही शुरू हो जाता है। इस भाषा में बातचीत करने और चीज़ों को समझने-समझाने की क्षमता के साथ बच्चे विद्यालय में दाख़िल होते हैं। अगर उनकी इस क्षमता का इस्तेमाल पढ़ाई के माध्यम के रूप में मातृभाषा का चुनाव करके किया जाये तो इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं।

यूनेस्को द्वारा भाषायी विविधता को बढ़ावा देने और उनके संरक्षण के लिए अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की शुरूआत की गई। हम अक्सर देखते हैं कि बहुत सी बातें अवधी, भोजपुरी, ब्रजभाषा, मगही, मराठी, कोंकणी, बागड़ी और गरासिया आदि भाषाओं (अथवा बोलियों) में कही जाती हैं उनका व्यापक असर होता है।

स्कूलों में मातृभाषा के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करें

राजस्थान के सिरोही जिले में मैंने पहली कक्षा के बच्चों से जो पहला वाक्य सुना, “बंदर दवाई सोंट रहा है।” यानि बंदर दवाई का छिड़काव कर रहा है। इसमें वाक्य संरचना तो हिंदी की है, मगर बच्चे ने बड़ी खूबसूरती से गरासिया भाषा के स्थानीय शब्दों का उपयोग अपनी बात को कहने के लिए किया है। कक्षा-कक्ष में बच्चों को अपनी मातृभाषा में बोलने और संवाद करने का अवसर देना जरूरी है ताकि बच्चे स्कूल से अपनापन महसूस करें और अपनी बात कहने में डरें नहीं।

कई बार मातृभाषा को हतोत्साहित करने की प्रवृत्ति स्कूलों में देखी जाती है। जैसे हिंदी बोलने में इंग्लिश मीडियम स्कूलों में फ़ाइन लगने वाली घटनाओं के बारे में हमने सुना है। ऐसे ही अवधी या अन्य मातृभाषाओं के गीतों को स्कूलों में गाने से बच्चों को हतोत्साहित किया जाता है, इसका अर्थ है कि हम बच्चों को उनके अपने परिवेश, संस्कृति और उनकी जड़ों से काट देना है। यह प्रक्रिया बड़ी चालाकी के साथ बचपन से ही शुरू हो जाती है और एक दिन हमें अहसास होता है कि हम अपनी ही जड़ों से अज़नबी हो गये हैं।

इससे बचने का एक ही तरीका है कि हम मातृभाषा में संवाद, चिंतन और विचार-विमर्श को अपने रोज़मर्रा की ज़िदगी में शामिल करें। इसके इस्तेमाल को लेकर किसी भी तरह की हीनभावना का शिकार होने की बजाय ऐसा करने को प्रोत्साहित करें।

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