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कैसे होगा उत्तर प्रदेश में मदरसों का आधुनिकीकरण?

‘अगर हम उत्तर प्रदेश के मदरसे’ इस वाक्यांश का गूगल सर्च करें तो पाते हैं कि सरकार द्वारा पिछले कुछ समय में लिए जाने वाले फ़ैसले ही सुर्खियों में नज़र आते हैं। जो कहते हैं, “मदरसों में ड्रेस कोड लागू होगा ताकि सभी बच्चों में एकरूपता आए। अब कुर्ता पायजामा नहीं चलेगा। उत्तर प्रदेश के मदरसों में ‘दीनी तालीम’ के साथ-साथ एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम भी लागू होगा ताकि बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ा जा सके।”

इसके अलावा मदरसों में होने वाले कार्यक्रम में राष्ट्रगान होने और इसकी वीडियोग्राफी करने को भी मीडिया द्वारा मदरसों के खिलाफ एक कड़े क़दम के रूप में पेश किया गया। सभी हेडलाइनों पर नज़र दौड़ाते हुए लग रहा था कि मदरसों के बारे में मीडिया की रिपोर्टिंग एक निश्चित सोच के साँचे में बंधी हुई है, इसमें ज़मीनी रिपोर्टिंग और संवाद का अभाव है।

‘दीनी तालीम’ के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा है जरूरी

आमतौर पर मदरसों का मुख्य उद्देश्य बच्चों को दीनी तालीम देना माना जाता है। इसके लिए वहाँ पढ़ाने वाले मौलवी मुख्य भूमिका में होते हैं। इसके अलावा की जिम्मेदारी प्रिंसिपल और मैनेजर द्वारा तय की जाती है। ऊपर बैठे लोगों की सोच का खुलापन मदरसों के पूरे माहौल को प्रभावित करता है।

यह बात व्यक्तिगत अनुभव के रूप में भी सामने आती है। वहाँ के शिक्षक बच्चों की तालीम को बच्चों के जीवन के आगे के भविष्य यानि जन्नत से जोड़ते हैं। एक चर्चा में मुझे कहना पड़ा कि जन्नत न तो आपने देखी है और न मैंने देखी है। तो उसके बारे में हम क्या कर सकते हैं। मगर हाँ, बच्चों को जिस दुनिया में जिन लोगों के बीच रहना है उनके साथ सामंजस्य के साथ रहने और संवाद के माध्यम से समस्याओं को हल करने की क्षमता का विकास जरूर कर सकते हैं।

‘मदरसों में बच्चों की पिटाई न हो और पढ़ाने का तरीका बदले’

बदलते समय के साथ मदरसों में भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सवाल और बच्चों की तैयारी का सवाल प्रमुखता पाने लगा है। जो भी आर्थिक रूप से सक्षम अभिभावक हैं, वे अपने बच्चों को मदरसे में पढ़ाने की बजाय निजी स्कूलों में भेज रहे हैं। जहाँ की फीस ज्यादा है। जहाँ की पढ़ाई के तौर-तरीके बिल्कुल अलग हैं।

मदरसे में अपनी पढ़ाई का अनुभव सुनाते हुए एक शिक्षा प्रेरक कहते हैं, “एक बार मदरसे में मुझे कोई चीज़ याद न होने की वज़ह से मेरी बहुत पिटाई हुई। इसके बाद मैंने मदरसे में पढ़ने से तौबा कर ली। फिर मैंने सरकारी स्कूल में दाखिला लिया और बाकी की पढ़ाई वहाँ से पूरी की। इसका असर यह हुआ कि मुझे उर्दू बहुत अच्छे से नहीं आती। अरबी बहुत अच्छे से नहीं आती, इसके कारण नमाज़ अदा करने में देर होती है। मैं अपने समाज से बहुत अच्छे से जुड़ नहीं पाया और लोग मुझे बहुत अलग नज़रिये से देखते हैं। मदरसे में दीनी तालीम में पिछड़ने के कारण बच्चों की सामूहिक पिटाई होती है, मुझे लगता है कि मदरसों में पढ़ाने का तरीका और बच्चों के प्रति इस तरह के व्यवहार में बदलाव आना चाहिए। मदरसे में जो लोग मदरसे से पढ़कर पढ़ा रहे हैं और जो लोग बाहर से पढ़कर यहाँ पढ़ा रहे हैं, दोनों लोगों की सोच में काफी अंतर है।”

मदरसों में अगर बच्चों की पिटाई रुक जाती है और पढ़ाने के तरीके में बदलाव होता है तो यह भी मदरसों के आधुनिकीकरण की दिशा में एक अहम क़दम होगा। एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू करने के बाद मदरसों के शिक्षकों को उत्तर प्रदेश के विभिन्न ज़िलों में डाइट (DIET) पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका असर मदरसों के संचालन पर निश्चित रूप से पड़ेगा और भविष्य में सुधार की उम्मीदों को जीवंत रखा जा सकता है, अगर इसमें मदरसों की ज़मीनी चुनौतियों को समझते हुए मिलकर समाधान खोजने के प्रयास होता है।

ट्रेन यात्रा के दौरान मदरसे में पढ़ाने वाले एक छात्र ने कहा, “मदरसे के मौलवी सोचते हैं कि हम मार खाकर आए हैं, तो मारकर पढ़ाएंगे।” इस तरह की सोच या माइंडसेट में बदलाव की कोशिश ही दीर्घकालीन में फ़ायदेमंद साबित होगी। क्योंकि बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता और बच्चों का स्कूल में सम्मान होना चाहिए, ऐसे मूल्यों पर एक गहरी समझ का विकास किये बिना, व्यवहार में बदलाव की उम्मीद करना बहुत हड़बड़ी होगी। मदरसों में असली बदलाव ज़मीनी स्तर पर होने वाले काम में हाथ बँटाने और साझे भरोसे की बहाली से होगी कि हमारा इरादा वास्तव में मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाना है। अभिभावकों के साथ सतत संवाद के अभाव में ऐसा कोई अभियान सिर्फ शब्दों की सजावट का काम करेगा, ज़मीनी बदलाव में उसकी कोई भूमिका नहीं होगी।

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2 Comments on कैसे होगा उत्तर प्रदेश में मदरसों का आधुनिकीकरण?

  1. Virjesh Singh // October 20, 2018 at 7:06 pm //

    बहुत-बहुत शुक्रिया यह लेख पढ़ने के लिए।

  2. Anonymous // October 20, 2018 at 1:21 pm //

    Brijesh sir,
    Nice article

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