एजुकेशन मिररः साल 2015 की 10 पॉपुलर पोस्ट
साल 2015 में बच्चों की भाषा, स्कूल और सिंगल टीचर स्कूलों से जुड़ी पोस्ट सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं। एक नज़र प्रमुख पोस्ट पर।
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साल 2015 में बच्चों की भाषा, स्कूल और सिंगल टीचर स्कूलों से जुड़ी पोस्ट सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं। एक नज़र प्रमुख पोस्ट पर।
अगर आप ‘कुछ बच्चों’ को पूरी क्लास मानते हैं। ऐसी मान्यता शिक्षण प्रक्रिया के लिए एक ख़तरे के रूप में सामने आती है।
सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक कहते हैं कि हमारे स्कूल में स्टाफ कम है। पड़ोस के स्कूल में ज्यादा स्टाफ हैं, लेकिन बच्चे कम हैं। एक गाँव में तीन स्कूलों की क्या जरूरत है, मगर गाँव के हर क्षेत्र को अपना स्कूल चाहिए। इसके कारण भी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर गिर रहा है। हम आठवीं तक बच्चों को पढ़ना ही सिखा रहे हैं।
किसी स्कूल को अच्छा बनाने वाले कारणों पर ग़ौर करें तो शिक्षकों के बीच आपसी तालमेल। बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार और अभिभावकों द्वारा घर पर बच्चों की देखभाल करना इत्यादि बातें प्रमुख कारणों के तौर पर सामने आती हैं। जानिए और कौन सी ऐसी बातें हैं जो किसी स्कूल को बेहतर बनाने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
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