सुर्ख़ियों में शिक्षा डियर टारगेट अचीवर्स!! पिछली चिट्ठी में शिक्षकों से बात हुई थी। इस बार की चिट्ठी शिक्षा क्षेत्र में टारगेट अचीव करने वाले साथियों को संबोधित है। वृजेश सिंह, संस्थापक-संपादक, एजुकेशन मिरर | 7 नवंबर 2015
बाल संसार जानना जरूरी है: रवीना मिड डे मील क्यों खाती है? सरकार की तरफ़ से स्कूली बच्चों को खाना देने की बजाय पैसे देने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। आदिवासी और ग्रामीण अंचल के सरकारी स्कूलों… 30 अक्टूबर 2015
मैं शिक्षक हूं शिक्षक कहते हैं, “आठवीं के बच्चों को भी पढ़ना सिखा रहे हैं” सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक कहते हैं कि हमारे स्कूल में स्टाफ कम है। पड़ोस के स्कूल में ज्यादा स्टाफ हैं, लेकिन बच्चे कम हैं।… 26 अक्टूबर 2015
शिक्षा पर संपादकीय शिक्षा विमर्शः ‘मैकाले को हम कब तक दोष देते रहेंगे?’ स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भी हम शिक्षा के क्षेत्र में कितना परिवर्तन ला पाएं हैं, इस पर सोचना और कुछ ठोस क़दम उठाना जरूरी है। 29 अप्रैल 2015
शिक्षा शिक्षा विमर्शः मूल्यांकन के ‘जाल’ में उलझी पढ़ाई आज स्कूलों में 'बच्चे' की जगह 'मूल्यांकन' केंद्र में है। आख़िर क्यों? 1 अप्रैल 2015
शिक्षा का अधिकार शिक्षा का अधिकारः क्या है वास्तविक स्थिति भारत में शिक्षा का अधिकार क़ानून 1 अप्रैल 2010 को लागू हुआ था। इसे लागू हुए पाँच साल हो गए हैं। पांच सालों में क्या बदला… 15 अप्रैल 2013