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शिक्षा के क्षेत्र में विमर्श का नया मंच है ‘एजुकेशन मिरर’

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एजुकेशन मिरर के लिए यह तस्वीर मुंबई से सांजुली ने भेजी।

जुलाई से नए शैक्षिक सत्र 2017-18 की शुरूआत हो रही है। एजुकेशन मिरर के लिए भी यह सत्र बेहद ख़ास है। यह पहला मौका है जब शिक्षकों के साथ, शिक्षा से जुड़ी ग़ैर सरकारी संस्थाओं में काम करने वाले दोस्तों और शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर लेखने करने वाले लेखकों और पत्रकार साथियों के साथ जुड़ने और सतत संवाद करने का मौका एजुकेशन मिरर के बहाने मिला है।

पहली बार दिल्ली में शिक्षा से जुड़े सेमीनार के दौरान बहुत से साथियों से जो एजुकेशन मिरर के नियमित पाठक हैं पहली बार प्रत्यक्ष तौर पर मिलने का मौका मिला।

शिक्षक भी पढ़ते हैं एजुकेशन मिरर

आज ही गाँधी फेलोशिप कर रही शिवांगी से बात हुई। उन्होंने कहा, “मुझे लग रहा था कि एजुकेशन मिरर कोई फेलो ही देख रहा है क्योंकि इसपर एक फेलो की स्टोरी पब्लिश हुई थी। मैं समय-समय पर इसे पढ़ती हूँ। इस पर पब्लिश होने वाली स्टोरीज़ अच्छी लगती हैं मुझे और इसकी कहानियां अपने शिक्षकों के साथ भी साझा करती हूँ।”

एक अन्य साथी ने बताया कि उनकी संस्था में काम करने वाली एक सहकर्मी ने उनके साथ एक स्टोरी शेयर करते हुए कहा कि देखो ये अपने एक फेलो की स्टोरी एजुकेशन मिरर पर पब्लिश हुई है। जिन साथी तक ये बात पहुंची उनको पहले से पता था, इस स्टोरी के बारे में। लेकिन अपने किसी परिचित की कहानी को एजुकेशन मिरर पर देखना और उसे अपने समूह के दोस्तों के साथ शेयर करना दिखाती है कि शिक्षा के विमर्श के रूप में उभरते हुए इस नए मंच के साथ लोगों का व्यक्तिगत जुड़ाव बन रहा है। यहां प्रकाशित होने वाली कहानियों को वे ग़ौर से पढ़ते हैं और अपने दोस्तों के साथ भी साझा करते हैं।

बढ़ रहा है एजुकेशन मिरर का दायरा

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सिरोही ज़िले में भाषा के शिक्षक कालूराम जी के साथ वृजेश सिंह। इनकी कहानी भी आपने एजुकेशन मिरर पर पढ़ी।

शिक्षक साथियों की समय-समय मिलने वाली प्रतिक्रियाओं ने इस काम को जारी रखने के लिए हौसला बढ़ाया है। उनका कहना है, “कोई तो है जो हमारी बात कर रहा है। कोई तो है जो हमारे लिए स्टैण्ड ले रहा है। हमारी आलोचनाओं के खिलाफ हैं। हमारे अच्छे प्रयासों को लोगों के बीच ले जाने और पूरे शैक्षिक माहौल में अच्छे काम के लिए तारीफ करने की सहज संस्कृति विकसित करने की बात कर रहा है।

एजुकेशन मिरर की स्टोरीज़ को विभिन्न पोर्टल पर भी जगह मिली है। जैसे टीचर्स ऑफ़ इंडिया, बेसिक शिक्षा डॉट ओआरजी और कुछ पत्रिकाओं में भी एजुकेशन मिरर की स्टोरीज़ का प्रकाशन किया गया है। इससे एजुकेशन मिरर की बढ़ती हुई लोकप्रियता और एजुकेशन मिरर पर प्रकाशित होने वाले कंटेंट की गुणवत्ता के प्रति लोगों का भरोसा साफ़ जाहिर होता है। इसके साथ ही एजुकेशन मिरर की सबसे ख़ास बात है कि इसने शिक्षा के क्षेत्र में उभरते हुए लेखकों को लिखने का मंच दिया है। नए सत्र में शिक्षा के क्षेत्र में लिखने वाले साथियों की नई कहानियों को पढ़ने के लिए तैयार रहिए। एजुकेशन मिरर के लिए आपका प्यार और साथ यों ही बना रहे। शिक्षा पर संवाद और विमर्श का सिलसिला यों ही जारी रहेगा।

नई उपलब्धियां

एक सरकारी स्कूल की कहानीएजुकेशन मिरर ने सरकारी स्कूल के शिक्षकों के मन में एक ख़ास जगह बनाई है। यहां पर प्रकाशित लेख शिक्षकों की तारीफ में कंजूसी क्यों को बार-बार पढ़ा गया। इस स्टोरी को फ़ेसबुक पर 431 बार शेयर किया गया।

इस आलेख के अंश सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों की तारीफ़ के पाँच कारणों को बेसिक शिक्षा डॉट ओआरजी पर एक पोस्ट के रूप में प्रकाशित किया गया। जिसे फेसबुक पर 334 बार शेयर किया गया।

पहला फेसबुक लाइव

हालांकि इस पोस्ट में एजुकेशन मिरर और इस पोस्ट के लेखक का जिक्र नहीं है। मगर फे़सबुक पर जहाँ शिक्षकों के प्रति आलोचनाओं की बाढ़ में उनके काम को संवेदनशीलता के समझने की कोशिश वाले ऐसे प्रयास ग़ौर करने वाले हैं। जिन्हें अनदेखा भी नहीं किया जा सकता है।

एजुकेशन मिरर का पहला फेसबुक लाइव एक शिक्षक ताराराम जी के ऊपर केंद्रित था। इसे बहुत से साथियों ने देखा और सराहा। इसके साथ ही ऐसे प्रयासों को निरंतर जारी रखने की भी बात कही। इस साल एजुकेशन मिरर की हिट्स जनवरी से जून तक 3 लाख 38 हज़ार रही। जबकि विज़िटर्स की संख्या एक लाख 28 हज़ार के आसपास रही। एजुकेशन मिरर के फ़ेसबुक पेज़ लाइक्स में एक हज़ार का आँकड़ा पार किया। यानि एजुकेशन मिरर पर प्रकाशित होने वाली स्टोरीज़ पर चर्चा का सिलसिला जारी है। तो आप भी दोस्तों के साथ शेयर करिए एजुकेशन मिरर की कहानी। अगर आपके कोई दोस्त लिखते हैं तो उनको भी एजुकेशन मिरर के लिए लिखने को प्रेरित कर सकते हैं ताकि शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की अनगिनत कहानियों को लिखने का सिलसिला यों ही जारी रहे।

(एजुकेशन मिरर की इस पोस्ट को पढ़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। इस पोस्ट के बारे में अपनी राय साझा करिए। अपने नाम के साथ अपनी टिप्पणी कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं। शिक्षा से जुड़े कोई सवाल, सुझाव या लेख आपके पास हों तो साझा करें। हम उनको एजुकेशन मिरर पर प्रकाशित करेंगे ताकि अन्य शिक्षक साथी भी इससे लाभान्वित हो सकें।)

 

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