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उत्तराखंड: लॉकडाउन में हिमोत्थान एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स इनिशिएटिव से शिक्षा को मिली निरंतरता

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लॉकडाउन के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पहाड़ों में पढ़ाई करते हुए बच्चे। (तस्वीरः हिमोत्थान)

जून महीने में उत्तराखंड के 13 जिले अनलॉक फेज़ 1 में प्रवेश करने को तैयार हैं. वहीं बहुसंख्यक जिलों (ओरेंज ज़ोन) में उचित छूट के साथ कृषि, उद्योग, आधारभूत सरंचना ,पर्यटन इत्यादि सेक्टर्स को सावधानी के साथ खोलने को सरकार तत्पर दिखाई दे रही है। किन्तु विद्यालयों को अनलॉक फेज़-2 में खोले जाने को लेकर अभी भी असमंजस की स्थिति बरक़रार है. कोविड़-19 की महामारी ने उत्तराखंड में बहुत सी जिंदगियों को प्रभावित किया है. ताज़ा आंकड़ो के अनुसार कुल 1043 मामले राज्य में आ चुके है और अबतक 7 लोगों की मृत्य हो चुकी है.

कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जहाँ देश के सभी राज्य प्रयासरत हैं वहीं विद्यालयों को पुनः खोलने हेतु सरकार और हिमोत्थान- टाटा ट्रस्ट्स जैसी समाजसेवी संस्थाएं मंथन कर रही हैं.

पहाड़ों में शिक्षा हुई प्रभावित

कोरोना के आसन्न संकट को भांपते हुए उत्तराखंड सरकार द्वारा सभी विद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों को 12 मार्च को ही बंद कर दिया गया. अचानक बंद हुए विद्यालयों ने शिक्षा क्षेत्र में कार्य कर रही संस्थाओं, सरकारी मशीनरी, पेरेंट्स, शिक्षकों एवं बच्चो को अपनी रणनीति को बदलने हेतु प्रेरित किया.

लॉकडाउन लगने से बमुश्किल 15 दिन पहले ही हिमोत्थान द्वारा ‘’एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स इनिशिएटिव इन उत्तराखंड हिमालया’’ परियोजना का आरम्भ किया गया था जिसमे 6 जिलो के तकरीबन 10,000 बच्चों के साथ अर्ली लिट्रेसी एवं फिजिकल लिट्रेसी पर चरणबद्ध तरीकों से कार्य किया जाना था. इसके साथ ही नैनीताल जिले के कोटाबाग विकास खंड के 30 सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में लाइब्रेरी और अर्ली लिट्रेसी के काम को प्राथमिकता दी गई.

अचानक बंद हुए विद्यालयों में शिक्षा के प्रचार–प्रसार को कैसे सुचारू रूप से बरकरार रखा जाए इसे लेकर हिम्मोत्थान द्वारा ऑन-लाइन क्लासेज़ की व्यवस्था की गई. लेकिन विद्यालयों के बंद होने से बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास कहीं न कहीं पीछे छूटने लगे थे. इसके साथ ही बच्चे घरो में बंद बंद रहने से अवसाद की अवस्था में भी आने लगे थे जो सबसे बड़ी समस्या थी.

हिमोत्थान के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी मनीष कुमार झा के अनुसार, ‘’देहरादून और नैनीताल के बड़े प्राइवेट विद्यालयों को भी बच्चों की पढ़ाई शुरू करने में अच्छा खासा वक्त लग रहा था. ये वे विद्यालय थे जिनके पास तकनीक, आउटरीच और फंड की कोई कमी नहीं थी. ऐसे में उत्तराखंड के सुदुरतम शहरों और दुर्गम ग्रामीण इलाकों के सरकारी विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चे जिनके माता-पिता तकनीक, फण्ड और भौगोलिक परिस्तिथियों से जूझ रहे थे तक डिजिटल क्रांति द्वारा शिक्षा को पहुंचाने की जिम्मेदारी हिमोत्थान ने निभाई. हिमोत्थान ने यह सुनिश्चित किया की ऑनलाइन शिक्षा के दौर में सुविधाओं के अभाव में सरकारी विद्यालयों के बच्चे पीछे न छुट जाएं. हिमोत्थान द्वारा पोषण एवं शिक्षण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा गया.’’

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मनीष कुमार झा ने कोविड-19 की ज़मीनी चुनौतियों के संदर्भ में समाधान तलाशन पर ध्यान दिया।

चूंकि कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते स्कूलों के लम्बे समय तक बंद रहने की बात सामने आ रही है, इसलिए हिमोत्थान (एन इनिशियेटिव ऑफ़ टाटा ट्रस्टस) ने लॉकडाउन से उत्पन्न हुए इस अभूतपूर्व स्थिति से निपटने के लिए बच्चों, अभिभावकों और सरकारी स्कलों के शिक्षकों के लिए एक वैकल्पिक ऑन लाइन कैलेंडर/कार्यक्रम तैयार किया है.

वरिष्ठ परियोजना अधिकारी मनीष कुमार झा के अनुसार ‘’23 मार्च 2020 से हिमोत्थान ने उत्तराखण्ड के 8 जिलों के 5500 छात्रों, 350 सरकारी स्कूल के शिक्षकों एवम लगभग 7,000 घरों को सार्थक रूप से डिजिटल साधनों से जोड़ा है ताकि बच्चे लंबे समय तक घर पर रहते हुए किसी तरह से चिन्तित न हों. हिमोत्थान ने इस लॉक डाउन के दौरान फोन काल, व्हाट्सऐप, यू-ट्यूब और फेसबुक आदि के माध्यम से अर्ली लिटरेसी एण्ड न्यूमरेसी (प्रारंभिक साक्षरता और संख्यात्मकता) पर जोर दिया है.

लॉकडाउन में भी बच्चों का सीखना कैसे जारी रहा?

अर्ली लिटरेसी एण्ड न्यूमेरसी (प्रारंभिक भाषा साक्षरता और संख्यात्मकता) को ऑन लाइन माध्यम में प्राथमिकता के तौर पर चिन्हित करने के पीछे हिमोत्थान परियोजना के उद्देश्यों को पूर्ण करने के साथ ही साथ लॉक डाउन के दौरान बच्चों के सीखने के नतीजों (आउटकम) का आंकलन करना भी है.

हिमोत्थान द्वारा तकनीकी के न्यूनतम इस्तेमाल की कोशिश की गयी. इसे कई तरीकों से किया गया जैसे ऑडियो-वीडियो कहानियों को साझा करके, कविताओं के माध्यम से, वर्तमान परिवेश से सम्बन्धित समसामयिक प्रश्न पूछ कर, बातचीत और आपसी संवाद को प्रोत्साहित करके हिमोत्थान द्वारा इस दिशा में कुछ अन्य प्रकार की रूचिकर गतिविधियों को भी आयोजित किया गया. कुछ प्रमुख आयोजन रहे ‘‘आओ कहानी सुनायें’’, ‘‘आओ कविता सुनायें’’ तथा कोविड-19 को लेकर बच्चों के मन में उत्पन्न होने वाले भावों को व्यक्त करने हेतु एक पेन्टिंग प्रतियोगिता का आयोजन. इस लॉक डाउन के दौरान हिमोत्थान द्वारा बच्चों को किताबें पढने हेतु भी प्रोत्साहित किया गया. हिमोत्थान का मानना है कि घर के अन्दर रहते हुए ये गतिविधियां बच्चों के विकास के लिए बेहतर हैं। हिमोत्थान ने यह भी सुनिश्चित किया कि यदि कुछ बच्चे स्वयं पढने में रूचि न दिखायें तो उनके माता-पिता उनके लिए यह कर सकें.

शैक्षिक तकनीक के इस्तेमाल से मिली मदद

शुरूआत में जब ऑनलाइन कक्षायें शुरू हुई तब संसाधनो के अभाव, स्मार्ट फोन की अनुपलब्धता और नेटवर्क कनेक्टिविटी ठीक न होने के कारण बच्चों और उनके माता-पिता को काफी कठिनाइयाँ हुई. इस तरह के अनेक तकनीकी कठिनाइयों को देखते हुए हिमोत्थान टीम ने अनेकों व्हाट्स एप्प ग्रुप्स बनाने पर विचार किया.

इसके साथ ही हिमोत्थान एजुकेशन फेसबुक पेज तथा हिमोत्थान एजुकेशन यू-ट्यूब चैनल पर कुछ छोटे-छोटे वीडियो बनाकर डाले ताकि बच्चे उन तक आसानी से पहुँच सकें. हिमोत्थान टीम द्वारा लॉक डाउन 1.0 से 4.0 के दौरान प्रारंभिक साक्षरता गतिविधियों (अर्ली लिटरेसी एक्टिविटीज) हिन्दी, अंग्रेजी तथा गणित और फिजिकल लिटरेसी के लेशन प्लान तैयार किये तथा इन्हें विभिन्न ग्रुप्स में भेजा ताकि बच्चे अपनी सुविधानुसार इन्हें सुन सकें.

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सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करती शिक्षिका। (तस्वीरः हिमोत्थान)

ऑनलाइन शिक्षण के साथ ही हिमोत्थान द्वारा बागेश्वर जिले के कठपुड़ियाछीना के 15 गाँवों के बच्चों हेतु पिछले 67 दिनों से 2 घंटे सुबह और 2 घंटे शाम प्रतिदिन सोशल डिस्टेंसिंग के नियामकों को ध्यान रखते हुए 15 बाल शिक्षिकाओं के माध्यम से कक्षाएं चलाई जा रही हैं. इन कक्षाओं में पहली से दसवीं तक के बच्चे प्रतिभाग कर रहें है. इस प्रातःकालीन एवं सायंकालीन कक्षाओं में बच्चे भाषा, गणित, अंग्रेजी के साथ ही नित्य प्रतिदिन फिजिकल लिटरेसी सेशन आधारित गतिविधयां भी करते है.

बच्चों के लिए नियमित शिक्षण गतिविधियों के साथ-साथ हिमोत्थान एजुकेशन एण्ड स्पोर्ट्स टीम इस कठिन समय में बच्चों को तरोताजा बनाये रखने के लिए इंडोर स्पोर्ट्स गतिविधियों का आयोजन कर रही है. इन गतिविधियों में वार्मअप, स्ट्रेचिंग, एज़िलीटी और हेंड मूवमेंट पर जोर देते हुए खेल-कूद आयोजित करवा रही है. बच्चो के साथ सेशन को और मजेदार करने हेतु हिमोत्थान हिंदी और गणित की पहेलियां और दिमागी कसरत का इस्तेमाल इनरजाईजर के रूप में कर रही है.

शिक्षा के साथ-साथ खेल को भी मिल रहा है प्रोत्साहन

इसके अतिरिक्त ई-लर्निंग की बेहतर प्रोग्रामिंग और पारदर्शिता बनाये रखने के लिए हिमोत्थान ने एक साप्ताहिक केलेंडर ‘‘हिमोत्थान दर्पण’’ का अनावरण किया. इसे प्रत्येक सप्ताह शनिवार की शाम विभिन्न ग्रुप्स के साथ शेयर कर आने वाले सप्ताह के कार्यक्रम की सुचना दी जाती है ताकि बच्चे और शिक्षक अपनी पूर्व तैयारी कर सकें. बच्चो एवं शिक्षकों के साथ एक चर्चा मंच की शुरुआत की है. इस मंच के माध्यम से अबतक तीन विषयों यथा (कैसा हो बाल साहित्य, बाल साहित्य एवं सिनेमा और बाल साहित्य का इतिहास) आयोजित की जा चुकी है. अल्प संसाधनो और सीमित नेटवर्क के बाबजूद बच्चों, शिक्षकों और उनके अभिभावकों का रेस्पोंस इन चर्चा मंच में उत्साहवर्धक रहा है.‘’

शिक्षण के साथ ही हिमोत्थान द्वारा अपनी सहयोगी संस्थाओं, शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ मिलकर यह भी सुनिश्चित किया कि आंगनबाड़ी में पंजीकृत बच्चों तथा स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए टेक होम राशन तथा सूखा राशन सभी बच्चों तक पहुँचे. हिमोत्थान ने इस लॉक डाउन के दौरान पहाड़ के एक बड़े समुदाय को बच्चों के अभिभावकों, स्वयं सहायता समूहों तथा फेडरेशनों के माध्यम से बड़े स्तर पर जोड़ा है. कोरोना संकट के बीच सरकारी विद्यालयों के बच्चो के मध्य शैक्षिक गतिविधियों को जारी रखने के प्रयासों के लिए अब तक हिमोत्थान को सरकारी शिक्षकों, बच्चों के माता-पिता एवं अभिभावकों के साथ ही शिक्षा अधिकारियों से बेहतरीन फीडबैक तथा समर्थन मिल रहा है.

जानिए शिक्षकों के अनुभव

राजकीय प्राथमिक विद्यालय गिन्तीगांव, कोटाबाग, नैनीताल की प्रधानाध्यापिका ममता गुप्ता ने बताया कि लॉकडाउन में पिछले 70 दिनों से हिमोत्थान सोसायटी द्वारा संचालित ऑनलाइन शिक्षा कार्यक्रम बेहद सराहनीय प्रयास है, इससे बच्चों को बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है। विभिन्न प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा रही हैं जिससे बच्चों में एक नई ऊर्जा देखने को मिल रही है।

राजकीय प्राथमिक विद्यालय धनपुर, कोटाबाग, नैनीताल की प्रधानाध्यापिका सुमन आर्या ने बताया कि इस कोरोना संकटकाल में हिमोत्थान सोसाइटी, बच्चों के लिए ऑनलाइन लर्निंग मटेरियल उपलब्ध करा रही है जिससे बच्चों को बहुत फायदा मिल रहा है।

टिहरी गढ़वाल से सुषमा चौहान ने बताया कि लॉक डाउन में हमें भी चिंता थी कि बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी। लेकिन हिमोत्थान सोसाइटी ने ऑनलाइन शिक्षा कार्यक्रम चलाकर बच्चों के पढ़ाई की मुश्किल को आसान कर दिया है।

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हिमोत्थान की तरफ से पढ़ाई के साथ-साथ खेल गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

बंदल घाटी, देहरादुन से द्वारिका प्रसाद ने बताया कि हिमोत्थान सोसाइटी पिछले 70 दिनों से प्रतिदिन बच्चों को ऑनलाइन लर्निंग मैटेरियल के साथ-साथ फिजिकल लिटरेसी पर आधारित वीडियोज उपलब्ध करा रही है, जिससे बच्चों को लॉकडाउन में भी बहुत फायदा मिल रहा है।

राजकीय प्राथमिक विद्यालय छानी कठपुड़ीयाचीना बागेश्वर से बाल शिक्षिका नीरू नेगी ने बताया कि पिछले 70 दिनों से बच्चे निरंतर कुछ ना कुछ सीख रहे हैं। समय-समय पर बच्चों के लिए प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा रही है। हिमोत्थान संस्था से हमें अच्छा सहयोग मिल रहा है।

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2 Comments on उत्तराखंड: लॉकडाउन में हिमोत्थान एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स इनिशिएटिव से शिक्षा को मिली निरंतरता

  1. शुक्रिया दुर्गा जी .

  2. Durga thakre // June 7, 2020 at 8:58 pm //

    बहुत खूब झा सर ।
    कोरोनो काल मे शिक्षा न रुके इसके लिए बेहतर कार्य करने के लिए आप सभी को बहुत बहुत बधाई ।

    हमें भी डिजिटल शिक्षा के माध्यम से शिक्षा में निरंतरता बनाये रखने के लिए बच्चों और पालकों को जागरूक बनाना होगा । बच्चों को मोटिवेट करते रहना होगा । चुनौतियों को दरकिनार करते हुए नए टेक्नोलॉजी से शिक्षा का प्रचार प्रसार करना सही हैं ।

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