पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती: सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की 25,753 नियुक्तियां
3 अप्रैल 2025 को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें पश्चिम बंगाल के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और गैर–शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया था।
यह मामला 2016 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है, जिसमें बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे।
2016 की भर्ती को लेकर क्यों उठ रहे थे सवाल?
पश्चिम बंगाल के स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) ने 2014 में शिक्षकों और गैर–शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की थी और यह प्रक्रिया 2016 में शुरू हुई थी। इस भर्ती में कुल 24,640 पदों के लिए 23 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। हालांकि, इसमें बेहद चौंकाने वाली बात यह थी कि 25,753 नियुक्ति पत्र जारी किए गए,जो घोषित रिक्तियों से अधिक थे।
कई उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में धांधली हुई है जैसे ओएमआर शीट से छेड़छाड़, कम अंक वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता देना और कुछ ऐसे लोगों को नौकरी देना जो शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) भी पास नहीं कर पाए थे। इन शिकायतों के बाद यह मामला कलकत्ता हाईकोर्ट में पहुंचा।
क्या था कलकत्ता हाई कोर्ट का फैसला?
कलकत्ता हाईकोर्ट ने अप्रैल 2024 में इस भर्ती को पूरी तरह रद्द कर दिया था। इसके साथ ही नियुक्त हुए उम्मीदवारों को 12% ब्याज सहित प्राप्त वेतन वापस करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को इसकी जांच जारी रखने का निर्देश दिया गया था। पश्चिम बंगाल सरकार ने हाईकोर्ट के उपरोक्त फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर लंबी सुनवाई के बाद 3 अप्रैल 2025 को अंतिम निर्णय आया।
इस फैसले से प्रभावित होने वाले कर्मचारियों को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि उन्हें अब तक मिले वेतन और लाभ को वापस नहीं करना होगा। इसके साथ ही, राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर नई चयन प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन उम्मीदवारों की नियुक्ति रद्द हुई, वे नई प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं। दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए विशेष प्रावधान करते हुए, उन्हें नई भर्ती पूरी होने तक सेवा में बने रहने और उम्र में छूट के साथ आवेदन करने की अनुमति दी गई।
राज्य की अन्य सेवाओं से नियुक्त होने वाले कर्मचारियों को वापस अपने विभाग में जाने का विकल्प दिया गया है। हालांकि ब्रेक की अवधि का वेतन उनको वहाँ से नहीं मिलेगा। उनकी सर्विस को एक ब्रेक के रूप में नहीं देखा जाए, ऐसी बात सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कही है। यह प्रक्रिया भी निर्धारित अवधि के भीतर राज्य सरकार को पूरी करनी है।
आखिर में कह सकते हैं कि नियुक्ति में होने वाले घोटाले युवाओं के भरोसे को कमजोर करते हैं। इसके कारण एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हो गया है जिसके कारण बड़ी संख्या में लोगों के सामने फिर से बेरोजगार होने का संकट खड़ा हो गया है। इससे शिक्षकों के साथ-साथ 25,753 परिवार भी प्रभावित होंगे। जो अंततः बल्कि पश्चिम बंगाल की शिक्षा व्यवस्था (खासतौर पर बच्चों की पढ़ाई) और राजनीति पर भी गहरा असर डालेगा।
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