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लेख: किताबों से जुड़ाव बढ़ाने के लिए जरूरी है ‘रीड अलाउड’

जय शेखर लिखते हैं, “इस वर्ष पराग (टाटा ट्रस्ट्स) की तरफ से पुस्तकों का एक संग्रह मुझे भी प्राप्त हुआ और तब तक मेरी तैनाती एक दूसरे विद्यालय में हो गई । नए बच्चों के साथ पुस्तकालय को सक्रिय करने में लगभग एक सप्ताह का समय लगा । बहुत जल्दी ही हमारा नियमित पठन-पाठन प्रारंभ हो गया। मैंने पुस्तकालय  से बच्चों को नियमित किताबें देना शुरू कर दिया और उन्हें पुस्तकालय रजिस्टर में दर्ज भी किया।”

इस प्रक्रिया में मुझे यह महसूस हो रहा था की विद्यालय में स्थित पुस्तकें पठन कौशल को बढ़ावा देने में तो उपयोगी हैं परंतु बाल साहित्य के विशाल संसार में बच्चों के प्रवेश के लिए बहुत ज्यादा मददगार नहीं है। इसके लिए मुझे अपने संग्रह की पुस्तकें उपलब्ध करानी ही होंगी।

क्या है पराग ऑनर लिस्ट

पीएचएल बुक बॉक्स, पराग ऑनर लिस्ट (PHL) पुस्तकों का एक संग्रह है, जिसे टाटा ट्रस्ट्स के पराग पहल द्वारा गैर-लाभकारी संस्थाओं, पुस्तकालयों, स्कूलों और अन्य पढ़ने को प्रोत्साहित करने वाले स्थानों को किताबों का यह सेट दिया जाता है। यह पहल बच्चों और युवाओं के लिए उत्कृष्ट पुस्तकों को बढ़ावा देने और उन्हें सुलभ बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

जब मुझे इस वर्ष का PHL बुक बॉक्स मिला तो यह मेरे लिए बहुत ही मददगार साबित होने वाला था,  क्योंकि इस बार के संग्रह में मुझे हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी माध्यम की भी लगभग 15 किताबें प्राप्त हुई। मेरे लिए अंग्रेजी किताबें को कक्षा में ले जाना एक नया अनुभव था। अंग्रेजी माध्यम की किताबों पर काम करना मेरे लिए एक नई शुरुआत और चुनौती दोनों थी। मैंने कक्षा चार और पांच के लिए दो किताबें चुनीं-

  1. Light’s Out
  2. The Runway Peacock

किताबों से परिचय के लिए ‘रीड अलाउड’

सबसे पहले गतिविधि जो किसी किताब से बच्चों का परिचय कराती है वह रीड अलाउड  हो सकती है पर मेरे लिए इन दोनों किताबों के साथ यह काम सबसे कठिन था,  क्योंकि बच्चे अंग्रेजी भाषा में किताब नहीं समझ सकते थे। फिर भी मैंने सोचा की भाषा का बंधन किताब की पहुंच के बीच आड़े नहीं आना चाहिए। इसलिए मैंने अत्यंत सुंदर रंगों  और चित्रों से सजी हुई किताब ‘द रनवे पीकॉक’ को बच्चों के सामने प्रस्तुत किया और उसके सुंदर चित्रों पर विस्तृत चर्चा की ।

 

दूसरे दिन “लाइट्स आउट” पर भी इसी प्रकार हिंदी अनुवाद करते हुए रीड अलाउड किया। यह किताब बेहद हृदय स्पर्शी आर मार्मिक थी। किताब के चित्र केवल काले और नीले रंगों में बने थे, क्यूंकि पूरी कहानी शाम के बाद के अंधेरे से जुड़ी हुई थी। फिर भी वे चित्र बहुत प्रभावशाली थे। बच्चों ने बहुत चाव से कहानी सुनी, संवाद के सभी अवसरों पर खूब सारी बातचीत की।

बच्चों का किताबों से जुड़ाव कैसे बनाएं?

इस बार इन दो किताबों को कक्षा में ले जाने का मेरा उद्देश्य सिर्फ किताब पढ़ना या चित्रों पर बातचीत करना नहीं था , अपितु बच्चों को किताबों से परिचित कराना और उससे जुड़ने के अवसर बनाना था। इसलिए मैं चाहता था कि वे किताब को इस तरीके से देखें कि वह किताब उनके जीवन में हमेशा के लिए शामिल हो जाए। क्योंकि बच्चे किताबें हाथ में लेने के बाद भी उसे पढ़ नहीं पा रहे थे , फिर भी चित्रों को पढ़ना उनके लिए बहुत कठिन नहीं था।

इस किताब के एक चित्र ने मुझे बहुत प्रभावित किया जिसमें पूरा गांव बरगद के पेड़ के पास इकट्ठा होता है और फिर वहां से वे अप्पा के साथ होते हुए उस बिजली के खंभे पर पहुंचते हैं जहां चिड़िया का घोंसला होता है। मुझे लगा कि यहां पर अवसर है जब हम मिलकर के एक टीम वर्क के रूप में एक प्रोजेक्ट बना पाएंगे।

रीड अलाउड के बाद बच्चों ने किया ‘चित्रांकन’

मैंने सभी बच्चों को करीब 6 इंच का यू-आकार का हार्ड पेपर काट कर दिया जिसमें उन्हें चेहरे बनाने थे। यह गांव के वे लोग थे जो चिड़िया को देखने आए थे। इसमें स्त्री ,पुरुष, बालक, वृद्ध सभी को बनाना था। कक्षा 5 के लगभग 21 बच्चों के समूह ने अपने-अपने चित्र बनाए। चित्रों में काफी विविधता थी।

दूसरे दिन मैंने लगभग 8 इंच का एक और कागज दिया जिसमें उन चेहरों के शरीर और कपड़े बनाने थे। मैंने उन्हें कुछ आवश्यक निर्देश दिए और उन्हें  समझाया । उन्होंने उन सभी के वस्त्र बनाए। पुरुष पात्र शर्ट टी-शर्ट ,कुर्ते, जैकेट पहने थे जबकि महिला पात्रों ने सूट और साड़ी पहनी थी। इस प्रकार हमारे पास गांव के 21 व्यक्तियों के पोट्रेट थे।

कैसे थे चित्र बनाने के अनुभव? 

फिर एक बड़े से कागज पर बच्चों की मदद से मैंने लाइट बॉक्स और चिड़िया तथा उसका घोंसला भी बनाया। यह सब दिखने में बहुत ही रंग-बिरंगा और तिलस्मी लग रहा था। हमें लगा कि यदि हम इसे एक गत्ते पर व्यवस्थित कर ले तो शायद एक बढ़िया प्रोजेक्ट बन जाएगा। इत्तेफाक से विद्यालय में एक बड़ा गत्ता उपलब्ध था, जिसे काटकर लगभग तीन बाई तीन फीट का टुकड़ा काटा। इसके बीच में चिड़िया का घोंसला चिपकाया और उसके चारों ओर गांव के 21 लोगों को बैठा दिया।

फिर हमने किताब के आवरण पृष्ठ का चित्र भी बनाया और एक गोल कागज पर पराग ऑनर लिस्ट का लोगो भी तैयार किया। इन दोनों को भी उसे बोर्ड पर कोनों में चिपका दिया। एक कोने पर सलीम सर की टॉर्च बनाई । बिजली के खंबे और बरगद का पेड़ भी बनाया। साथ ही जैसे कि चंद्रा ने गांव वालों को लकड़ी और मिट्टी के घोसले बनाना सिखाया था, तो हमने भी अपने बोर्ड पर वैसे चित्र बनाएं। दिनभर की मशक्कत और नए-नए आइडिया से मिलकर हमारा बोर्ड सज कर तैयार हो गया।

(लेखक परिचय: जय शेखर, उत्तर प्रदेश के एक सरकारी विद्यालय में बतौर शिक्षक कार्य कर रहे हैं। पुस्तकालय, भाषा शिक्षण और बच्चों को दीवार पत्रिका ‘तितली’ के माध्यम से उनके रचनात्मक योगदान का अवसर दे रहे हैं। इस लेख में उन्होंने उन्होंने अपने नये विद्यालय में बच्चों के साथ रीड अलाउड करने के एक रोचक अनुभव को साझा किया है। इस लेख के बारे में अपने अनुभव, विचार और टिप्पणी जरूर लिखें।)

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Durga

आजकल बच्चे बड़ी कक्षा में किताबें नहीं लाते , उसकी जगह वे गाईड उठा लाते है , क्योंकि हमारे कुछ शिक्षक गाइडों से पढ़ाते। हथियार घर रखकर जंग पर जाने वाली बात है सर ।
किताबों का महत्त्व बताता लेख पढ़ने, समझने के साथ चरितार्थ करने योग्य है । क्योंकि मूल भाव किताबों में ही मिलते है ।

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