पहली कक्षा में तो हर बच्चा ‘टॉपर’ है
पहली कक्षा के बच्चों ने टॉपर की स्टोरी को एक नया मोड़ दे दिया था। भाषा शिक्षिका इस बदलाव पर हैरान थीं। उनके चेहरे पर मेहनत की ख़ुशी साफ़-साफ़ दिखाई दे रही थी।
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अच्छे निर्देश भाषा शिक्षण में मदद करते हैं। रीडिंग रिसर्च में पठन कौशल व पढ़ने की आदत पर ध्यान दिया जाता है। पहली-दूसरी कक्षा के बच्चों को भाषा कैसे सिखाएं। प्राथमिक स्तर पर लेखन कौशल का विकास जरूरी है। भाषा शिक्षण के वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल। मौखिक अभिव्यक्ति। मुखर वाचन। स्वतंत्र पठन।
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पहली कक्षा के बच्चों ने टॉपर की स्टोरी को एक नया मोड़ दे दिया था। भाषा शिक्षिका इस बदलाव पर हैरान थीं। उनके चेहरे पर मेहनत की ख़ुशी साफ़-साफ़ दिखाई दे रही थी।
इस पोस्ट में पढ़िए दस ख़ास बातें जो भाषा शिक्षण की प्रक्रिया को रोचक बनाती हैं और हर बच्चे का सीखना सुनिश्चित करती हैं।
पहली कक्षा में आने वाला बच्चा अगर वर्णों, मात्राओं को पहचान पाता है। वर्ण-मात्राओं को आपस में मिलाने के कारण वर्ण की ध्वनि में होने वाली परिवर्तन को समझ पाते हैं, तो उसके लिए पढ़ना आसान हो जाता है।
बारहखड़ी सीखने मात्र से बच्चों के लिए पढ़ना आसान हो जाता तो शायद हिंदी पढ़ने में बच्चों को इतनी मुश्किल पेश नहीं आती।
Language classroom should utilize the imagination of students to think on a familiar event and object.
भारत में अभी संस्कृत बनाम जर्मन भाषा के सवाल पर 'त्रिभाषा फॉर्मूले' पर चर्चा गरम है.
इस पोस्ट में पढ़िए भाषा शिक्षण की दस ख़ास बातें.
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