परीक्षाओं में कोर्स की किताब पढ़ें या कहानियां?
कोर्स की किताबों को कहानियों से ज्यादा प्राथमिकता देना परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन के दबाव की कहानी दोहराता है।
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कोर्स की किताबों को कहानियों से ज्यादा प्राथमिकता देना परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन के दबाव की कहानी दोहराता है।
आज के दौर में बच्चों को पढ़ने के लिए कैसे प्रेरित करें। यह सवाल बेहद अहम है। इस पोस्ट में पढ़िए इस सवाल का जवाब।
अगर आप भी ऐसे सवालों से दो-चार होते हैं तो पढ़िए यह पोस्ट।
बच्चों के रोज़ाना स्कूल आने पर काफ़ी ध्यान दिया जाता है। मगर सबसे अहम सवाल है कि क्या स्कूल आने वाले बच्चे सीखते भी हैं?
शिक्षा और जीवन की गुणवत्ता के बीच सीधा रिश्ता है. शिक्षा के क्षेत्र में तमाम बड़े सवाल अपने उत्तरों की खोज में बेचैन है.
आज का दिन बहुत अच्छा बीता। सुबह की हड़बड़ी से लेकर शाम की धीमी रफ्तार तक बहुत कुछ याद करने लायक है…
प्रधानाध्यापक नेतृत्व विकास कार्यक्रम में काम करते हुए दो साल होने को हैं। प्रधानाध्यापकों में केवल…
एक स्कूल में कहानी की किताब इश्यू करवाते बच्चे कई साल पहले की एक घटना याद आती है। जिसमें बच्चों ने…
स्कूल लायब्रेरी से मनपसंद किताबें छाँटते बच्चों की ख़ुशी देखने लायक थी, जो थोड़ी देर पहले नाराजगी के कह रहे थे कि हम बची-खुची किताबें क्यों ले? अब उन्हीं बच्चों के चेहरे पर नाराजगी की जगह ख़ुशी के भाव तैर रहे थे।
सरकारी स्कूल किसी समाज की वास्तविक स्थिति का आईना होते हैं। वे बताते हैं कि समुदाय के लोग सार्वजनिक…