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भाषा के एक कालांश में क्या-क्या होता है?

hqdefaultतीन बच्चों के हाथ में उल्टी किताब है। वे अभी किताब का उल्टा और सीधा होने के मायने समझ रहे हैं। शिक्षक उनको दुरुस्त करने के निर्देश दे रहे हैं, बच्चे समझ नहीं पा रहे हैं कि शिक्षक आख़िर कहना क्या चाहते हैं? वे क्यों उनकी तरफ विशेष ध्यान दे रहे हैं।

आख़िर में शिक्षक ख़ुद बच्चों की किताब ठीक करते हैं, बच्चे बाकी बच्चों से अपनी किताबों की तुलना करते हैं और इस बात को समझने की कोशिश करते हैं कि उनकी किताब भी अब उसी तरीके से रखी है, जैसे बाकी बच्चों के सामने रखी है। इस बात से बच्चों को संतोष होता है और शिक्षक को ख़ुशी होती है कि पूरी क्लास सेम पेज़ पर है। यानि अब यहां से पढ़ाने के काम को आगे बढ़ाया जा सकता है।

वास्तविक परिस्थिति

कक्षा में वर्णों को पढ़ने के दौरान कुछ बच्चे ‘ह’ वर्ण को ‘ख’ बोल रहे हैं। शिक्षक का ध्यान इस बात की तरफ जाता है। वे बाकी बच्चों को रोककर, उन बच्चों को सही अभ्यास का मौका देते हैं जो ‘ह’ को ‘ख’ बोल रहे हैं। वहीं कुछ बच्चे पाठ को रटकर बोल रहे हैं। उनका आत्मविश्वास और टाइमिंग देखने लायक है। बच्चे वर्णों पर अंगुली फेर रहे हैं और उसकी बनावट को समझ रहे हैं। वर्णों को लिखने का अभ्यास कर रहे हैं।

इस दौरान कुछ बच्चे अपनी कॉपी लेकर शिक्षक के पास आते हैं और कहते हैं कि हम लिख नहीं पा रहे हैं। शिक्षक उनको वर्णों के लिखने का एक-एक स्टेप समझाते हैं। खुद से लिखकर कोशिश करने का मौका देते हैं। उसके बाद अगले बच्चे की बारी आती है। वह चाहता कि शिक्षक उसकी कॉपी पर भी लिखें। जिसे देखकर वह नीचे उतार सके।

निर्देश हैं महत्वपूर्ण

हिंदी भाषा के कालांश में गरासिया भाषा में निर्देश दिये जा रहे हैं। यह बच्चे की ‘होम लैंग्वेज’ है। बच्चे के घर में परिवार के सारे सदस्य इसी भाषा में बात करते हैं। शिक्षक भी इसी परिवेश से आते हैं, इसलिए अपनी बात बच्चों तक पहुंचाने के लिए स्थानीय भाषा में दिये जाने वाले निर्देश कारगर साबित होते हैं।

बच्चे हिंदी भाषा में रफ़्तार के साथ आने वाले निर्देशों को समझने में थोड़ा समय ले रहे हैं। क्लास में सवालों के जवाब पूछने के दौरान उनकी भागीदारी बढ़ रही है। वे कुछ बातों को ज्यों का त्यों हिंदी में दोहराने का आनंद ले रहे हैं। एक बच्चा अपनी किताब में बने चित्र को पास बैठे बच्चे को दिखा रहा है। उसके बारे में कुछ बता रहा है।

कॉपी में लिखने के दौरान कुछ बच्चे कॉपी भी उल्टी पकड़ रहे हैं। उनका जहाँ मन हो रहा है, वहां लिख रहे हैं। जो बच्चे अभी लिखना सीखने की राह पर हैं वे अक्षरों को बड़े आकार में बना रहे हैं। ये बच्चे कम उम्र के हैं। जबकि जिन बच्चों की सही उम्र है। वे निर्देशों को ठीक-ठीक पकड़ पा रहे हैं। वे अक्षरों की बनावट और आकार का सटीक अनुमान लगा पा रहे हैं।

पठन कौशल का विकास

शिक्षक बच्चों के पठन कौशल पर विशेष ध्यान देने के लिए वर्णों को मिलाकर पढ़ने वाली गतिविधि पर ख़ास ध्यान दे रहे हैं ताकि बच्चों में  शब्द पठन का कौशल विकसित किया जा सके। इसके साथ-साथ शिक्षक उन शब्दों को नोट कर रहे हैं जिनमें बच्चों को उलझन हो रही है ताकि उनकी पुनरावृत्ति पर काम करके बच्चों की समझ को पुख्ता किया जा सके।

वर्ण के साथ मात्राएं लगाकर पढ़ने का अभ्यास करवाया जा रहा है। इसमें बच्चे मात्रा लगने के बाद आवाज़ में होने वाले बदलाव को व्यावहारिक ढंग से समझने का प्रयास कर रहे हैं ताकि पढ़ने के दौरान मात्रा लगने के बाद होने वाले बदलाव का बच्चे स्वाभाविक ढंग से सटीक अनुमान लगा सकें और पढ़ सके। क्लास में ज्यादातर बच्चों के लिए अभी //आ// की मात्रा को समझना बहुत आसान है।

मगर वे ऊपर लगने वाली मात्राओं को पकड़ने में थोड़ा समय ले रहे हैं। कुछ बच्चों के लिए ए की मात्रा आसान है तो बाकी बच्चों को ई वर्ण और उसकी मात्रा पहचानने में बहुत आसानी हो रही है। ऐसा लगता है कि ई वर्ण की बनावट का सबसे अलग होना और उसकी मात्रा लगने के बाद वर्ण की आवाज़ में होने वाले बदलाव को वे बहुत ढंग से समझ पाएं हैं।

आवाज़ों का खेल

इसके अलावा क्लास में बच्चे एक खेल खेलते हैं। इसमें वे मौखिक रूप से किसी शब्द की पहली आवाज़ को पहचानने की कोशिश करते हैं। कुछ बच्चों के लिए यह सबसे मनोरंजक गतिविधि है। वे बड़े मजे से शब्द सुनते हैं और पहली आवाज़ बताते हैं। आवाज़ों को मिलाकर शब्द बनाने और किसी शब्द में शामिल आवाज़ों को अलग-अलग करने का खेल भी बच्चे खेल रहे हैं।

अभी बच्चों को आवाज़ मिलाने वाली गतिविधि करने में तोड़ने से ज्यादा आसानी होती है। इस कांसेप्ट को समझने के लिए शिक्षक उनके नाम की आवाज़ों को अलग-अलग करके मिलाने के माध्यम से समझाने की कोशिश करते हैं। इससे बच्चों को बड़ी आसानी से आवाज़ों के मिलाने वाले तरीके के बारे में जानकारी मिल रही है। भाषा के कालांश का नजारा किसी इंजीनियरिंग क्लास जैसा नज़र आता है, जहां हर बच्चा आवाज़ों और वर्णों के साथ कोई न कोई काम कर रहा है। लिख रहा है। चित्र बना रहा है। आपस में बातें कर रहा है। कहानी सुन रहा है। उससे जुड़े सवाल सुन रहा है। उनके ऊपर विचार कर रहा है। सवालों का जवाब दे रहा है।

यह नजारा है भाषा के एक कालांश का, जहां बच्चे पढ़ना-लिखना सीख रहे हैं। 

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