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गुणवत्तापूर्ण शिक्षा क्या है?

बच्चे पढ़ना कैसे सीखते हैं, पठन कौशल, पढ़ना है समझनाशिक्षा में गुणवत्ता होनी चाहिए। यह बात बार-बार किसी नारे की तरह दोहराई जाती है। हम इस नारेबाज़ी से अलग हटकर इस मुद्दे को देख पाएं, इसीलिए इस पोस्ट में हम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (quality education) को समझने का प्रयास कर रहे हैं।

आसान शब्दों में, “गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मतलब ऐसी शिक्षा है जो हर बच्चे के काम आये। इसके साथ ही हर बच्चे की क्षमताओं के संपूर्ण विकास में समान रूप से उपयोगी हो।”

हर बच्चे के लिए उपयोगी

यानि ऐसी शिक्षा हर बच्चे की वैयक्तिक विभिन्नता का ध्यान रखने वाली होगी। हर बच्चे के सीखने का तरीका अलग-अलग होता है। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर बच्चे के सीखने के तरीकों को अपने में समाहित करने वाली होगी ताकि क्लास में कोई भी बच्चा सीखने के पर्याप्त अवसर से वंचित न रह जाये। इसके साथ ही हर बच्चे को विभिन्न गतिविधियों, खेल और प्रोजेक्ट वर्क के माध्यम से उनको सीखने का मौका देने वाली भी होगी।

ऐसी शिक्षा में चीज़ों को समझने (अर्थ निर्माण) के ऊपर विशेष फोकस होगा। बच्चों को चर्चाओं के माध्यम से अपनी बात कहने और ज्ञान निर्माण की प्रक्रिया में भागीदारी का मौका मिलेगा। इस नज़रिये से संचालित होने वाली कक्षाओं में गतिविधियों और विषयवस्तु में एक विविधता होगी। शिक्षक के नज़रिये में लचीलापन होगा। वे हर बच्चे को साथ-साथ सीखने के अतिरिक्त खुद के प्रयास से भी सीखने का पर्याप्त मौका देंगे ताकि बच्चों का आत्मविश्वास बढ़े।

जीवन कौशलों का विकास करे

ऐसी शिक्षा में बच्चों के सामने समस्या समाधान की दिशा में सोचने वाली परिस्थितियां रखी जाएंगी ताकि बच्चा ऐसे जीवन कौशलों का विकास कर सके जो आने वाले भविष्य में उसके काम आयेगा। इसके लिए क्लास में एक ऐसा माहौल होना जरूरी है जहाँ बच्चे भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस करें और जहाँ उनकी रचनात्मकता की अभिव्यक्ति के लिए भी पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। स्कूल में ऐसे माहौल के लिए समुदाय के साथ अच्छी सहभागिता की जरूरत होगी क्योंकि बग़ैर समुदाय के सहयोग के ऐसे सकारात्मक माहौल का निर्माण करना स्कूल के लिए संभव नहीं है।

क्योंकि स्कूल भी समुदाय का एक हिस्सा है। समुदाय के तरफ से मिलने वाले सकारात्मक सहयोग से ही स्कूल में जेंडर के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त किया जा सकता है। स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों को भावनात्मक संबल दिया जा सकता है। उन्हें आगे की शिक्षा के लिए प्रेरित किया जा सकता है। भारत में भी बालिका शिक्षा के ऊपर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में बच्चों को चुनाव का अवसर दिया जाता है। ऐसे माहौल में एक शिक्षक सुगमकर्ता के रूप में काम करता है। कक्षा के केंद्र में बच्चा होता है। बच्चे का सीखना सबसे ज्यादा मायने रखता है। ऐसे में एक बच्चे को पूरा सम्मान मिलता है कि वह आत्मविश्वास के साथ क्लास में अपनी बात बग़ैर किसी झिझक व संकोच के कहे।

सीखने का बेहतर माहौल

क्लासरूम में पढ़ाई का काम सुचारु ढंग से होने के लिए बच्चों की बैठक व्यवस्था और कमरे में साफ-सफाई का होना भी जरूरी है। गंदे और आपाधापी वाले माहौल में किसी बच्चे के लिए अपनी पढ़ाई के ऊपर ध्यान केंद्रित करना संभव नहीं रह जायेगा। ऐसे में जरूरी है कि क्लास में पढ़ने का काम सुचारू ढंग से होने के लिए बुनियादी माहौल उपलब्ध हो। आखिर में कह सकते हैं कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एक बहुआयामी संप्रत्यय है। आने वाली पोस्ट में इसके अन्य पहलुओं को समझने की कोशिश करेंगे।

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Anonymous

आज की स्थिति में प्रत्येक शिक्षक के लिए यह जरुरी है।
मुझे यह लेख बहुत अच्छा लगा।में कक्षा कक्ष में इसका उपयोग करुंगा।

संतोष

एक शिक्षक को इसकी जानकारी होना आवश्यक है ।
इस हेतु उपयुक्त सार प्रस्तुत है । पढ़ने के बाद मुझे भी
अच्छा लगा । अगले पोस्ट जल्द भेजने की कष्ट करेंगे ।

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