कविताः बच्चे की ख़ुशी

20180409_1709262040721829.jpgइस जगह मत चलो
बच्चा वहीं चलता है

यह फूल मत तोड़ो
बच्चा उसी फूल को तोड़ता है

इस पुस्तक को मत छुओ
बच्चा उसे अवश्य छूता है

उधर मत झांको
बच्चा उधर जरूर झांकता है

अपनी भोली जिज्ञासा में
बच्चा हर नियम तोड़ता है
और जोखिम उठाकर
अपनी ख़ुशी में एक नई कड़ी जोड़ता है।

                                                                                    – बलदेव वंशी

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