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बाल संसार

इस कॉलम में बच्चों के लिखे अनुभव। क्लासरूम में उनके अनुभव। शिक्षकों व शिक्षा के बारे में उनकी राय। उनकी बनाई तस्वीरों और बदलते समय के बारे में बच्चों के विचारों को प्रमुखता के साथ पेश करता है।

जानना जरूरी है: रवीना मिड डे मील क्यों खाती है?

सरकार की तरफ़ से स्कूली बच्चों को खाना देने की बजाय पैसे देने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। आदिवासी और ग्रामीण अंचल के सरकारी स्कूलों में मिलने वाले भोजन के बदले पैसा देने का विकल्प बहुत से बच्चों को भोजन के अधिकार से वंचित कर देना होगा। [...]

गरासिया, हिंदी और मारवाड़ीः क्या कहते हैं बच्चे?

सातवीं और आठवीं कक्षा के बच्चों ने बताया कि अगर उनकी मातृभाषा में किताबें होतीं तो उनके लिए पढ़ना-समझना आसान होता। हिंदी की मुश्किलों को भी वे बड़ी बेबाकी से सामने रखते हैं। तो आइए 'बच्चों की दुनिया' में आज रूबरू होते हैं बच्चों की लिखावट से। [...]

“पापा कहते हैं, वह पढ़ने में तुक्के लगाती है”

“बच्चों को हिंदी में पढ़ना सिखाना बहुत आसान काम है। लेकिन हिंदी में लिखना सिखाना काफी मुश्किल काम है।" यह कहना है एक शिक्षक का। इस पोस्ट में पढ़िए पढ़ना-लिखना सीखने से जुड़े रोचक अनुभवों के बारे में। [...]