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प्रेरित करने वाले शिक्षक की भूमिका

पुस्तक चर्चाः एक शिक्षक के अनुभवों का जीवंत दस्तावेज़ है ‘अध्यापकीय जीवन का गुणनफल’

वर्ष 1947 में जब श्री श्याम नारायण मिश्र सातवीं कक्षा में थे, तब देश आज़ाद हुआ था और गणेश मिडिल स्कूल, पुपरी, सीतामढ़ी  के संस्थापकों ने विद्यार्थियों के बीच तब मिठाइयाँ बाँटी थीं। [...]

शिक्षक इंटरव्यू सिरीज़ः ‘दिन-प्रतिदिन बच्चों के साथ-साथ मैं भी कुछ न कुछ नया सीख रही होती हूँ’

इंटरव्यु सिरीज़ की चौथी कड़ी में पढ़िए एजुकेशन मिरर की मैनेजिंग एडिटर डॉ. नीलम वर्मा और दिल्ली की शिक्षिका स्वाति की बातचीत। [...]

शिक्षक इंटरव्यू सिरीज़ः ‘मैंने पिता से गणित विषय से प्रेम करना और हिन्दी शिक्षक से लिखने का हुनर सीखा’

शिक्षक इंटरव्यु सिरीज़ की तीसरी कड़ी में पढ़िए दिल्ली के शिक्षक डॉ. राजेश ठाकुर के साथ बातचीत के प्रमुख अंश। [...]

शिक्षक प्रोत्साहन सिरीजः ‘बच्चों को पढ़ाने के जुनून और अच्छे व्यवहार के कारण याद आते हैं शिक्षक’

कृति अटवाल उत्तराखंड के नानकमत्ता पब्लिक स्कूल में पढ़ रही हैं। शिक्षक प्रोत्साहन सीरीज़ के लिए उन्होंने यह स्टोरी लिखी है। [...]

शिक्षक प्रोत्साहन सिरीजः ‘लॉकडाउन में भी मिल रही है शिक्षकों की प्रेरणा, वायरस कोई बाधा नहीं’

शिक्षक प्रोत्साहन सीरीज़ के इस अंक में पढ़िए रिया चंद की लिखी स्टोरी। रिया दसवीं कक्षा की छात्रा हैं। [...]

शिक्षक प्रोत्साहन सिरीजः ‘मेरे शिक्षक बच्चों के नाम के साथ ‘जी’ शब्द लगाकर संबोधित करते थे’

डॉ.केवल आनन्द लिखते हैं, "वर्ष 1978 में माधावानन्द चौबे जी हमारी कक्षा में आए और उन्होंने बच्चों को उनके नाम के आगे जी लगाकर संबोधित किया। हम सब इस संबोधन से हैरान थे।" [...]