तुक्का लगाने वाले बच्चे पढ़ना सीख जाएंगे?
अगर आपके मन में भी यह सवाल है तो पढ़िए यह पोस्ट।
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अगर आपके मन में भी यह सवाल है तो पढ़िए यह पोस्ट।
अगर बच्चों की पढ़ाई ऐसी भाषा में हो जिसे बच्चे समझते ही नहीं तो ऐसी पढ़ाई का क्या फायदा है?
इस पोस्ट में पढ़िए एक भाषा कालांश के वास्तविक अनुभवों के बारे में।
लिखते-लिखते लिखना सीखा वाली बात तो आपने भी सुनी होगी। मगर बच्चे पढ़ते-पढ़ते पढ़ना कैसे सीख जाते हैं? पढ़िए इस पोस्ट में।
इस पोस्ट में पढ़िए दस ख़ास बातें जो भाषा शिक्षण की प्रक्रिया को रोचक बनाती हैं और हर बच्चे का सीखना सुनिश्चित करती हैं।
बहुत से स्कूलों में बच्चों को अपनी मातृभाषा का इस्तेमाल करने से रोका जाता है।
किसी भी स्कूल में भाषा की कक्षा ऐसी होनी चाहिए जहाँ भाषा अपनी संपूर्णता और सहजता के साथ मौजूद हो।
भारत में अभी संस्कृत बनाम जर्मन भाषा के सवाल पर 'त्रिभाषा फॉर्मूले' पर चर्चा गरम है.
भाषा का "समग्रतावादी दृष्टिकोण" भाषा विमर्श के गलियारों में "होल लैंग्वेज अप्रोच" के नाम से जाना…