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रविवार, 25 अक्टूबर 2026

गिजूभाई बधेका की दिवास्वपन को पढ़ने से क्या समझ बनी?

गिजूभाई बधेका की महत्वपूर्ण कृति है 'दिवास्वपन', जो प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में किए गए उनके प्रयोगों का संग्रह है। जानिए इस किताब की महत्वपूर्ण बातों के बारे में।

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भारत में प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में अनूठे प्रयोग करने वाले गिजूभाई बधेका को महात्मा गांधी ने मूछों वाला माँ कहा था। बच्चों के साथ उनके प्रयोगों का संकलन उनकी पुस्तक ‘दिवास्वपन’ में मिलता है।
1. बच्चों से बात करने की प्रक्रिया की गिजूभाई सटीक व्याख्या करते हैं ।
2. कहानी बच्चों की रूचि व जिज्ञासा को खींचने के लिए वाकई बहुत उपयोगी है।
3. हमें बच्चों के साथ काम करते धैर्य की जरूरत होती है।
4. आस-पास के सामाजिक परिवेश और वातावरण से बच्चों को अलग करके देखने की दृष्टि सीमित है।
5. खेलना पढ़ाई का अभिन्न हिस्सा है।
6. कोर्स की किताबों के इतर भी पढ़ने के लिए बच्चों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
7. बच्चों को अपने नियम खुद बनाने के लिए मौके देने चाहिए।
8. माता-पिता को भी बच्चों के बारे में सोचने के लिए साझीदार बनाना चाहिए।
9. अध्यापक को यह नहीं सोचना चाहिए कि वह सिखाने वाला है और बच्चे सीखने वाले हैं। उसको इससे आगे जाकर उनको बच्चों को खुद से सीखने के लिए माहौल और स्वतंत्रता देने में यकीन रखना चाहिए।
10. अंत में सबसे महत्वपूर्ण बात हमें उन पर भरोसा करना चाहिए।
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