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कैसे बनती है कहानी?

बच्चों से बात करने के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए उनको कहानी कैसे बनती है, इस बात से परिचित कराया। ताकि वे इसकी बुनावट को समझ सकें। इससे भी आगे बढ़कर वे अपनी भावनाएं कहानी के माध्यम से व्यक्त कर सकें। इससे मिलने वाले आनंद को महसूस कर सकें। आज मुझे उनसे अंग्रेजी के एक पाठ पर चर्चा करनी थी। जिसका शीर्षक था “बुद्धिमान जज” यह गाँव में एक-दूसरे के घर के आमने-सामने रहने वाली दो औरतों की कहानी है। जो अपने किसी विवाद का निपटारा करने की फरियाद लेकर जज के पास जाती हैं।

कहानी में रमा जज साहब से फरियाद करती है, “जज साहब शान्ता ने 6 महीने पहले मुझसे घी उधार लिया था। लेकिन अभी तक मुझे वापस नहीं लौटाया है।” रमा की बात से शान्ता नाराज होकर कहती है, “जज साहब रमा मेरे ऊपर झूठा आरोप लगा रही है। मेरे पास बीस गाय है, जबकि रमा के पास मात्र दो गाय हैं। मैं भला क्यों उससे घी उधार लेने लगी ?

दोनों की बात सुनकर जज साहब रमा से पूछते हैं, “तुम्हारे इस लेन-देन के समय वहां कोई मौजूद था क्या?” यह सवाल सुनकर रमा सोच में पड़ जाती है। वह बताती है कि वहां कोई नहीं था। तो जज साहब रमा और शान्ता  से अगले दिन आने की बात कहते हैं। साथ ही एक हिदायत भी देते हैं कि तुम लोग सामने वाले दरवाजे से न दाखिल होकर , पिछले दरवाजे से आकर कोर्ट में एक साथ हाजिरी दोगे। ऐसा करना बहुत जरूरी है।

 अगले दिन उनके आने के पहले जज साहब अपने संतरी से कहकर पिछले रास्ते पर गड्ढा खुदवा देते हैं। जिससे वहां पर काफी कीचड़ हो जाता है। जब रमा और शान्ता एक साथ वहां से होकर आती हैं तो उनके पांवों में कीचड़ लग जाते हैं। जज साहब उन दोनों को देख रहे होते हैं। वे अपने संतरी से कहकर दोनों को एक-एक बाल्टी पानी भिजवाते हैं ताकि वे अपने पांव धोकर कोर्ट में हाजिर हों और उसके बाद फैसला सुनाया जा सके।

रमा ने उस एक बाल्टी पानी से अपना पांव अच्छी तरह से धो  लिया।  जबकि शान्ता ने पूरे एक बाल्टी उलेड़ दिए लेकिन फिर भी उसका पांव साफ नहीं हुआ। उसे और पानी लेना पड़ा। जब वे दोनों कमरे में हाजिर होती हैं तो जज साहब शान्ता से कहते हैं कि शान्ता रमा का एक किलो घी वापस कर दो। तो शान्ता सकपका जाती है कि जज साहब को यह बात कैसे पता चली कि वह रमा से घी ऊधार ले गई थी। जज साहब ने कहा, “जो औरत एक बाल्टी पानी से अपना पांव नहीं धो सकती। वह बीस गायों की देख-रेख अच्छे ढंग से कैसे कर सकती है।”

उन्होंने शान्ता से कहा, “जीवन में संसाधनों की बर्बादी करने से हमें कई तरह की तकलीफों का सामना करना पड़ता है। इसलिए आगे से इस बात का ध्यान रखना।” इस तरह रमा को इंसाफ मिलता है। उसे शान्ता एक किलो घी लाकर वापस देती है।

अगर शान्ता रमा को समय से घी वापस कर देती तो हमें इस तरह के झगड़े के लिए अपना कीमती समय बर्बाद नहीं करना पड़ता, यह बात सुनकर वे सारे बच्चे हंस रहे थे। दूसरी बात यह कि शान्ता हर काम हड़बड़ी में करती थी। उसे अपनी गायों को पानी देना है । अगर वह उनको दस बाल्टी पानी पिलाती है। तो हड़बड़ी में बाल्टी ले जाने पर कुछ पानी तो बाल्टी से बाहर गिर जाएगा। तो गायों को  दस बाल्टी पानी की जगह पांच बाल्टी से ही काम चलाना पड़ेगा।

अगर गायों को आठ बोझा घास खिलानी हो तो जिस तरीके से जल्दी-जल्दी शान्ता चलती है, उस तरह से तो आधी घास रास्ते में ही गिर जाएग। गायों को आठ बोझे की जगह चार बोझा घास ही मिलेगी। अगर गायों को  पर्याप्त मात्रा में चारा-पानी नहीं मिलेगा तो वे दूध क्या खाक देंगी। अगर गायें पर्याप्त दूध नहीं देंगी तो फिर घी कहां से बनेगा।  बच्चों को यह बात जंच गई। उनको सारा मामला समझ में आ गया।

इस तरह की छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करके लोगों का वक्त बरबाद नहीं करना चाहिए। अगर हम किसी से कोई वस्तु उधार ले रहे हैं तो हमको उसे समय के भीतर ही वापस कर देना चाहिए। आख़िर में सबसे खास बात हमें अपना काम एकाग्र होकर करना चाहिए ताकि हमें उसका बेहतर परिणाम मिले।

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