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‘एकलव्य स्कूल’ की 5 ख़ास बातें क्या हैं?

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राजस्थान के आदिवासी अंचल में स्कूल जाते बच्चे।

भारत के वित्तमंत्री अरुण जेटली ने साल 2018 के बजट सत्र में बोलते हुए कहा कि सरकार आदिवासी बहुत क्षेत्रों में ‘एकलव्य स्कूल’ खोलेगी।

सबसे ख़ास बात है कि एकलव्य के मॉडल स्कूल का आइडिया नया नहीं है, ऐसे स्कूल पहले संचालित हो रहे हैं, जिनको केंद्र सरकार विस्तार देना चाहती है।

एकलव्य की कहानी

एकलव्य एक मशहूर धनुर्धर थे, जिन्होंने अर्जुन को भी इस कला में परास्त किया था। उन्होंने जगंल में खुद से अभ्यास करके धनुष-बाण चलाना सीखा था, गुरु दक्षिणा के रूप में द्रोणाचार्य ने एकलव्य से उनका अंगूठा माँग लिया था।

उपरोक्त घटना का जिक्र आज भी लोग गुरू द्वारा शिष्य के प्रति भेदभाव वाले व्यवहार को रेखांकित करने और एक शिष्य के लगन द्वारा खुद प्रयास करके किसी विधा में महारत हासिल करने वाली घटना के रूप में किया जाता है। सरकार उनके नाम को आदिवासी क्षेत्रों में पढ़ने वाले बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने वाली ‘एकलव्य मॉडल स्कूल’ बनाकर फिर से चर्चा में ला रही है।

एकलव्य मॉडल स्कूल की 5 ख़ास बातें इस प्रकार हैं

  1. एकलव्य स्कूलों की स्थापना आदिवासी बहुत ब्लॉकों में की जायेगी, जहाँ की 50 प्रतिशत से ज्यादा आबादी (20 हजार से अधिक जनसंख्या) आदिवासी समुदाय की है। उदाहरण के तौर पर राजस्थान के सिरोही ज़िले के पिण्डवाड़ा ब्लॉक में ऐसे स्कूल खोलने की योजना है।
  2. एकलव्य स्कूल आवासीय विद्यालय होंगे, जो नवोदय की तर्ज़ पर बनेंगे। नवोदय विद्यालयों में ग्रामीण और आदिवासी अंचल के प्रतिभाशाली बच्चों को प्रवेश परीक्षा में सफल होने के बाद कक्षा 6 में प्रवेश दिया जाता है और ऐसे बच्चे 6 से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी करते हैं।
  3. सरकार की मंशा है कि आदिवासी इलाक़ों से आने वाले बच्चों को उन्हीं के परिवेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। 12वीं तक की शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा के लिए बच्चों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने की सरकार की तरफ से क्या योजना है, इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है।
  4. आदिवासी अंचल के बहुत से विद्यालय अकेले शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। सरकारी स्कूलों में संसाधनों का अभाव है, ऐसे में इस तरह के विद्यालयों से आदिवासी अंचल में अच्छी शिक्षा मुहैया कराने के प्रयासों को गति मिलेगी।
  5. इन विद्यालयों में आदिवासी अंचल की स्थानीय कला, संस्कृति, खेलों और कौशल विकास को बढ़ावा दिया जायेगा।
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