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चर्चा: विश्व बैंक की रिपोर्ट्स कौन पढ़ता है?

‘विश्व बैंक’ हैरान है कि उनकी रिपोर्ट जो पीडीएफ के रूप में वेबसाइट पर अपलोड की जाती है, उसे बेहद कम लोग ही पढ़ रहे हैं। चुनिंदा रिपोर्ट्स हैं जिसे 100 से ज्यादा लोगों ने डाउनलोड किया है। यह जानकारी विश्व बैंक द्वारा इस सवाल पर सोचने के बाद सार्वजनिक हुई कि हमारी रिपोर्ट कौन पढ़ रहा है? यह रिपोर्ट 2014 की है, मगर आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।

एक चौथाई बजट सिर्फ रिपोर्ट्स के लिए

कौन पढ़ेगा? किसको पढ़ाएं? कैसे पढ़ाएं? पढ़ने को रोचक कैसे बनाएं ताकि उस ज्ञान का लोग लाभ उठा सकें जो पीडीएफ रिपोर्ट के रूप में निर्मित हो रहा है। गौर करने वाली बात है कि विश्व बैंक अपने कुल बजट का लगभग एक चौथाई हिस्सा ऐसे अध्ययन और रिपोर्ट तैयार करने पर खर्च करता है ताकि सामाजिक बदलाव में इसकी भूमिका सुनिश्चित हो सके। मगर आंकड़े तो कुछ और ही कहानी कहते हैं।

कैसे बढ़ाएं रीडरशिप?

इससे एक बात तो साबित होती ही है कि विचारों का महान होना ही जरूरी नहीं है, बल्कि उसे रोचक व सहज तरीके से लोगों तक पहुंचाना भी आवश्यक है। ताकि वे विचार क्रियान्वयन की मंज़िल तक पहुंच सकें। रीडरशिप बढ़ाने के सवाल सर हर कोई जूझ रहा है।

जाहिर सी बात है कि इन रिपोर्ट्स को लोगों तक पहुंचाने के लिए अलग-अलग माध्यमों का सहारा लिया जाना चाहिए। जैसे इंटरव्यू, वीडियो रिपोर्ट, संक्षिप्त रिपोर्ट, पीपीटी इत्यादि। केवल पीडीएफ अपलोड करना भी एक तरह की परंपरा का निर्वाह भर लगता है, इससे परे जाकर विभिन्न भाषाओं में रोचक सामग्री मुहैया कराने पर ध्यान देने वाली बात प्रमुखता से उभरती है।

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