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बच्चे के शिक्षक के नाम एक पत्र

प्रिय शिक्षक/शिक्षिका,

आपको नमस्कार! शिक्षक दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं और बधाइयां। इस मौके पर आपकी भूमिका के महत्व को रेखांकित करने और बच्चों के जीवन में लंबी छाप छोड़ने वाली भूमिका पर रौशनी डालने की जरूरत है। एक ऐसे दौर में जब शिक्षकों पर चौतरफा हमले हो रहे हैं। उनकी क्षमता पर संदेह किया जा रहा है। उनको मीडिया में एक विलेन की तरह पेश करने की कोशिश हो रही है। सरकारी स्कूलों की विफलता का ठीकरा आपके सर फोड़ने की कोशिश हो रही है। नीति आयोग जैसी संस्थाओं की तरफ से तथाकथित खराब चल रहे सरकारी स्कूलों के निजीकरण और पीपीपी मोड में  देने की सिफारिश का दौर है।

पुरानी पेंशन की माँग और शिक्षकों के खाली पदों को योग्य लोगों द्वारा भरने की माँग हो रही है। शिक्षामित्रों को स्थायी नियुक्ति और नियमित रोज़गार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, आप अभी भी कुछ राज्यों में किताबों का इंतज़ार कर रहे हैं। अपना कोई काम करवाने के लिे विभाग में बतौर पुरस्कार अपनी मेहनत की कमाई को बतौर घूस देने को मजबूर हैं। आपको चाइल्ड केयर लीव के लिए भी सिफारिश खोजनी पड़ी रही है या फिर वित्तीय जुगाड़ के माध्यम से आपको अपना काम निकलवाना पड़ रहा है, बहुत दुःख होता है, इन सारी परिस्थितियों को देखकर जिसमें आप काम कर रहे हैं।

शिक्षकों के हक़ में मुखर हो रहे हैं प्रोत्साहन के स्वर

एक सकारात्मक बात है कि शिक्षकों के प्रति प्रोत्साहन और सहयोग के स्वर भी मुखर हो रहे हैं। शिक्षकों के मंच सक्रिय हो रहे हैं और शिक्षकों की आवाज़ वैकल्पिक मीडिया के माध्यमों के सहारे बाहर आ रही है। जैसे मुश्किल हालात आपके सामने हैं, वैसी ही हिंसा और आलोचना का सामना नई पीढ़ी के बच्चे भी कर रहे हैं। बड़ों के पास उनसे बात करने के लिए समय नहीं है। उनके परवरिश और पढ़ाई की जिम्मेदारी को निभाने का समय अभिभावकों के पास नहीं है। समय बदल रहा है और इस बदलते समय में तकनीक से इंसानों का समय छीन लिया है और उनको एक ऐसे समय  में धकेल दिया है, जब वास्तविक ज़िंदगी के सापेक्ष वर्चुअल ज़िंदगी का दबाव साफ-साफ महसूस हो रहा है। ऐसे दौर में आपकी भूमिका एक बच्चे के प्रति बहुत ज्यादा बढ़ गई है।

IMG_20180220_103420.jpgआपसे बतौर अभिभावक अपेक्षा कि आप बच्चे को अपने बच्चे जैसा ही स्नेह दें। उसकी क्षमताओं पर भरोसा करें और उसे अपनी क्षमताओं को स्वाभाविक गति से विकसित होने का अवसर दें। भले ही आज का दौर प्रतिस्पर्धा है, मगर आप किसी होड़ का हिस्सा बच्चे को न बनने दें।

आप उसे होमवर्क के दबाव से मुक्त रखें। उसकी रूचि और जिज्ञासा को प्रोत्साहन दें। उसे अन्य बच्चों के साथ घुलने-मिलने का मौका दें, ताकि वह टीम के खिलाड़ी के रूप में अपनी भूमिका की पहचान कर सके। बच्चे को आप पाठ्यपुस्तकों के साथ-साथ साहित्य और किताबों की उस व्यापक दुनिया से भी रूबरू होने का मौका दें, जो उसे जीवन में दूसरों के दुःख के प्रति संवेदनशील होना, विचारों की यात्रा में अपने नन्हें पाँव मजबूत करने में मदद करेगी। बच्चे को अगर आप ऐसा माहौल दे सकें, जो उसे सकारात्मक-स्व के विकास के साथ-साथ दूसरों के सकारात्मक पहलुओं को प्रोत्साहित करने में मदद करे तो बड़ी अच्छी बात होगी।

बच्चे को पुरस्कार के प्रलोभन और दण्ड से डर से मुक्त करें

हर बच्चे के सीखने की गति या रफ्तार अलग-अलग होती है। तो उसे विकसित होने देना स्वाभाविक गति से ताकि उसका बचपन बचा रहे और उसका लगाव बना रहे शिक्षा की प्रक्रिया से। ताकि बहुत से विद्यार्थियों की भांति वह शिक्षण प्रक्रिया के उबाऊ और यांत्रिक होने के बोझ व दबाव से आज़ाद रह सके और अन्य बच्चों को भी ऐसा ही माहौल देना। बच्चे को आप पुरस्कार के प्रलोभन और दण्ड के डर से मुक्त रखना ताकि वह मजबूती से अपने पाँवों पर आत्मविश्वास के साथ चलना, गिरना और फिर संभलना सीख सके।

जीवन में बहुत कुछ पुरस्कार और दण्ड की परवाह किये बग़़ैर भी हासिल किया जा सकता है, यह मैंने अपने जीवन के अनुभवों से सीखा है। उसे सिखाना बेफिक्र होकर अपने मन की करने की आज़ादी को जीना और अपनी ग़लतियों से खुद सबक लेने और आगे बढ़ना की कला ताकि वह जीवन के हर क्षेत्र में एक आत्मनिर्भर अध्येता के रूप में अपने जीवन की राह चुन सके और उन पलों में जब उसे बतौर शिक्षक आपके योगदान का अहसास हो, वह दिल से आपका शुक्रिया कह सके। अपने जीवन को दिशा देने के लिए आपके योगदान को सार्वजनिक और निजी जीवन में लोगों के साथ सहज ही साझा कर सके।

बतौर शिक्षक आपकी यात्रा सुखद बने और अच्छे अनुभवों से आपको अपने रास्ते पर सतत आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिलता रहे, इन्हीं शुभकामनाओं के साथ यह पत्र समाप्त करता हूँ। आपसे फिर मिलते हैं कभी अगली चिट्ठी के साथ।

 

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