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लाइब्रेरी से बच्चों को जोड़ने के लिए प्लानिंग क्यों जरूरी है?

आमतौर पर शिक्षण योजना बनाने की बात मुख्य विषयों जैसे हिन्दी, गणित, अंग्रेजी, विज्ञान इत्यादि के लिए ही होती है। पाठ योजना (लेसन प्लानिंग) या शिक्षण योजना का जिक्र बीएड, डीएलएड के पाठ्यक्रम में भी किया जाता है, जहाँ इससे जुड़े प्रोजेक्ट या असाइनमेंट किये बिना शिक्षक बनने का कोई भी कोर्स पूरा नहीं होता है। तो हम पुस्तकालय में किसी कहानी को सुनाने के लिए कोई योजना क्यों नहीं बनाते हैं।

पढ़ें लेखः कक्षा-कक्ष की गतिविधियां, शिक्षा के उद्देश्य और पुस्तकालय

जब विद्यालयी शिक्षा में प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्तर या माध्यमिक स्तर पर लाइब्रेरी की बात होती है तो लेन-देन को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलती है और इसका रिकॉर्ड रखना प्रमुख जिम्मेदारी बन जाता है। आज जो शिक्षक विद्यालय में पढ़ा रहे हैं उनमें से अधिकांश ने अपने बचपन के दिनों में बाल साहित्य और विद्यालय की पाठ्यपुस्तकों से इतर अध्ययन की सामग्री विदेशों से आने वाले अनुदित साहित्य ( खासकर रूसी कहानियां व उपन्यास) के माध्यम से संपन्न थी।

इसके साथ-साथ और कॉमिक्स, चंपक, नंदन, बालहंस और अन्य बाल पत्रिकाओं की सशक्त मौजूदगी भी थी जो जो समय के साथ धीरे-धीरे परिप्रेक्ष्य में चली गईं। या समय के बदलाव ने उनको चलन से बाहर का रास्ता देखने के लिए मजबूर कर दिया। या फिर उनकी आम पब्लिक में डिमांड या माँग धीरे-धीरे कम होती गयी। इसके कारण बाल पत्रिकाओं की कीमतें बढ़ती चली गयीं और वो आम लोगों की पहुंच से भी दूर हो गयीं। पहले बाल पत्रिकाओं की संपादकीय टीम का पाठकों व बच्चों के साथ प्रत्यक्ष संवाद होता था, लेकिन मुनाफे की होड़ और खर्चों की कटौती व माँग में कमी के कारण संवाद की यह कड़ी भी विलुप्त हो गई।

योजना की जरूरत क्यों? 

लाइब्रेरी की किताबों का इस्तेमाल करने के लिए योजना बनाने की जरूरत क्यों है? इस सवाल का जवाब हमें ऊपर के पैराग्राफ की आखिरी पंक्ति से मिलता है, ताकि बच्चों के साथ संवाद की कड़ी टूटे नहीं और किताबों के माध्यम से विभिन्न मुद्दों पर संवाद की गुंजाइश बनी रहे। क्लासरूम में किसी विषय के आसपास सार्थक संवाद निर्मित हो सके। बच्चों को अपने परिवेशीय अनुभवों को रखने का अवसर मिले और किसी विषय को अलग-अलग आयाम व नजरिये से देखने व समझने का मौका मिल सके, एक सक्रिय व जीवंत लाइब्रेरी का सर्वोच्च लक्ष्य यही होता है।

अगर हम लिखित में पुस्तकालय की किताबों पर काम करने की योजना बनाते हैं तो हमें पता होगा कि हमें क्लासरूम में क्या करना है? कक्षा का सिलसिलेवार ढंग से संचालन किस तरीके से हो रहा होगा? बच्चों की तरफ से कहानी सुनाने के दौरान या कहानी सुनाने के बाद चर्चा के समय किस तरह के रिस्पांस आ रहे होंगे? अगर कोई सवाल संवाद को आगे बढ़ाने में मदद नहीं करता है तो उसकी जगह कौन सा दूसरा सवाल इस्तेमाल किया जा सकता है। इस योजना को मुख्य रूप से तीन चरणों में पूरा किया जाता है

कहानी सुनाने से पहले – किताब के कवर पेज पर चर्चा और कहानी के बारे में अनुमान

कहानी सुनाने के दौरान – कहानी में आगे क्या होगा और अनुमान वाले सवाल पूछना

कहानी सुनाने के बाद – कहानी का रिकैप करना, कहानी में कौन-कौन से पात्र थे, कहानी किस बारे में थी, कहानी के शुरुआत, मध्य और अंत को लेकर चर्चा करना, कहानी को अपने शब्दों में सुनाने का मौका बच्चों को देना, कहानी पर केंद्रित चित्र बनाने का मौका बच्चों को देना।

पढ़ने की आदत: मोबाइल लाइब्रेरी, बिग बुक्स और पढ़ने का स्वतंत्र समय

लाइब्रेरी में किताबों के माध्यम से गतिविधि करते समय बच्चों के साथ संवाद में अलग-अलग तरह के सवाल पूछकर उनकी विभिन्न क्षमताओं जैसे अनुमान लगाने, कल्पना करने, सोचने और विभिन्न परिस्थितियों को समझकर फैसले करने व स्वतंत्र चिंतन की क्षमता विकसित करने का अवसर दिया जाता है।

(आप एजुकेशन मिरर को फ़ेसबुकएक्स और यूट्यूब पर फ़ॉलो कर सकते हैं।     एजुकेशन मिरर के लिए अपने लेख भेजें educationmirrors@gmail.com पर।)

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