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भारत के आँगनबाड़ी केंद्रों की 10 खास बातें क्या हैं?

भारत में कुल स्वीकृत आँगनबाड़ी केंद्रों की संख्या लगभग 14 लाख (13.99 लाख) है। 30 जून 2023 तक लगभग 13.96 लाख आँगनबाड़ी केंद्रपोषण ट्रैकरएप्लिकेशन पर पंजीकृत थे, जो इनके सक्रिय होने की पुष्टि करता है। इसमें मुख्य आँगनबाड़ी केंद्र (AWCs) और मिनीआँगनबाड़ी केंद्र दोनों शामिल हैं।

आँगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका मिलकर एक आँगनबाड़ी केंद्र का सक्रिय संचालन करते हैं। केंद्र पर बच्चों के सीखने-सिखाने सं संबंधित विभिन्न गतिविधियों का कैलेंडर व योजना के अनुसार संचालन किया जाता है। इसमें बच्चों के पोषण और पढ़ाई दोनों को प्रमुखता के साथ शामिल किया गया है, इसकी मजबूती के लिए वर्तमान में ‘पोषण भी और पढ़ाई भी’ (PBPB) अभियान का संचालन किया जा रहा है।

31 दिसंबर, 2023 तक देश में 13,48,135 आँगनबाड़ी कार्यकर्ता और 10,23,068 आँगनबाड़ी सहायिकाएं काम कर रही थीं। आँगनबाड़ी केंद्र कुपोषण, स्वास्थ्य और पूर्व प्राथमिक शिक्षा की ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पहुंच की दृष्टि से रीढ़ की हड्डी की तरह काम करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आँगनबाड़ी केंद्रों की संख्या अधिक है, हालांकि शहरी गरीब बस्तियों में भी इनकी जरूरत के अनुसार पहुंच लगातार बढ़ रही है।

लेख पढ़ें: ‘सक्रिय आंगनवाड़ी’ बनाने वाली कार्यकर्ताओं के प्रोत्साहन में कंजूसी क्यों?

भारत के संदर्भ में आँगनबाड़ी केंद्र का खासकर ग्रामीण और शहरी गरीब क्षेत्रों में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य,पोषण और पूर्व प्राथमिक शिक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पढ़िए इसकी 10 खास बातें।

1. आँगनबाड़ी केंद्र बच्चों (0-6 साल), गर्भवती और धात्री माताओं को पूरक पोषण प्रदान करते हैं, जो कुपोषण की समस्या को हल करने में काफी हद तक मददगार है।

2. ये केंद्र नियमित स्वास्थ्य जाँच और टीकाकरण के माध्यम से बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

3. आँगनबाड़ी केंद्र 3-6 साल के बच्चों की पूर्वप्राथमिक शिक्षा तक आसान पहुंच के माध्यम सेस्कूल रेडिनेसके मिशन को आगे बढ़ा रहे हैं। इसके साथसाथ बच्चों के आजीवन सीखने की मजबूत बुनियाद बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं।

4. आँगनबाड़ी कार्यकर्ता आम तौर पर स्थानीय महिलाएँ होती हैं जिनको रोजगार पाती हैं, इससे उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति में बेहतर होती है। इसके साथ ही साथ वे स्थानीय संदर्भ से बेहतर ढंग से परिचित होती हैं इससे विभिन्न सेवाओं की लाभार्थियों तक पहुंच को आसान बनाती हैं।

5. भारत में कुपोषण एक बड़ी समस्या है,और आँगनबाड़ी केंद्र कुपोषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। इसके माध्यम से कुपोषित बच्चों को चिन्हांकन और पोषण माह में ऐसे बच्चों पर विशेष ध्यान देने के लिए अभियान भी चलाया जाता है।

6. जागरूकता फैलाना: स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण के प्रति माताओं और समुदाय में जागरूकता के प्रसार में आँगनबाड़ी केंद्र एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

7. आँगनबाड़ी केंद्र एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) कार्यक्रम का हिस्सा है, जो गर्भधात्री महिलाओं. बच्चों, किशोरियों और अन्य महिलाओं से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करते हैं और इसका लाभ लोगों तक पहुंचाते हैं।

8. आँगनबाड़ी केंद्र गाँवों में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देते हैं और सामाजिक एकजुटता को मजबूत बनाते हैं।

9. बच्चों और महिलाओं को समयसमय पर पोषण और स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी सेवाओं से रोगों की शुरुआती स्तर पर रोकथाम में मदद मिलती है। स्वास्थ्य की गंभीर स्थिति में रेफरल का काम भी हमारे आँगनबाड़ी केंद्र करते हैं।

10. आँगनबाड़ी कम लागत में बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुँचने का प्रभावी माध्यम हैं, जो इसे भारत जैसे बड़ी आबादी और विविधता से संपन्न देश के लिए बेहद उपयुक्त बनाता है।

(आप एजुकेशन मिरर से फ़ेसबुकएक्स और यूट्यूब के जरिए भी जुड़ सकते हैं। अपने लेख और अनुभव ईमेल करें educationmirrors@gmail.com पर।)

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