क्या हमारी सोच में बदलाव से सरकारी स्कूलों में बदलाव संभव है?
भारत के सरकारी स्कलों में बदलाव के लिए सोच में बदलाव की जरूरत है।
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भारत के सरकारी स्कलों में बदलाव के लिए सोच में बदलाव की जरूरत है।
पढ़ने का रास्ता झिझक तोड़ने और प्रयास करने से आसान होता है।
डॉ. अरविंद प्रकाश सिंह कहते हैं कि बच्चों का ठहराव और अच्छी पढ़ाई दो ही प्राथमिकताएं हैं।
इस पोस्ट में पढ़िए सरकारी स्कूलों की एक ऐसी कहानी जो ज़मीनी सच्चाइयों में बार-बार सामने आती है।
भारत में सरकारी स्कूलों की लगातार आलोचना क्या दर्शाती है? पढ़िए इस पोस्ट में।
सरकारी स्कूलों की वर्तमान स्थिति के हम सब जिम्मेदार है। ऐसे में ख़ुद से यह सवाल पूछना जरूरी है कि हम स्कूल क्यों जाते हैं?
पहली कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे भी अपने शिक्षकों और स्कूल के बारे में सोचते हैं। आख़िर उनके मन में क्या-क्या ख्याल आते होंगे।
स्कूलों में डाक और बहुतेरे कामों के कारण पढ़ाई पर असर पड़ता है। इसके बारे में एक शिक्षक कहते हैं कि बच्चों को न पढ़ाने का मेरे पास कोई बहाना नहीं है।