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‘उच्च-स्तर के चिंतन’ में रूस और चीन से पीछे हैं इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ने वाले भारतीय स्टूडेंट्स

भारत, रूस और चीन में इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स के बीच होने वाले सर्वे में विश्व बैंक और स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी के सर्वे में यह बात कही गई है। इस सर्वे में 200 कॉलेजों के स्टूडेंट्स के रैंडम विधि से चुनकर अध्ययन किया गया। ध्यान देने वाली बात है कि इसमें IITs शामिल नहीं हैं।

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, “गणित और आलोचनात्मक चिंतन में भारत के स्टूडेंट्स की उपलब्धि काफी बेहतर है। पर वे ‘हायर ऑर्डर थिंकिंग’ यानि उच्च-स्तर के चिंतन में रूस और चीन के स्टूडेंट्स से तुलनात्मक रूप से पीछे हैं।”

‘सामान्य पृष्ठभूमि’ वाले स्टूडेंट्स का प्रदर्शन बेहतर

इसकी एक ख़ास बात और भी है कि अपेक्षाकृत सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले स्टूडेंट्स का प्रदर्शन अच्छी पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने वाले स्टूडेंट्स से बेहतर है। सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले स्टूडेंट्स वे हैं जो गांवों, गरीब परिवारों और सामाजिक रूप से पिछड़े समुदाय से आते हैं।

स्किल के मामले में चीन और रूस से तेज सीखते हैं भारतीय स्टूडेंट्स

निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में लेक्चर पद्धति की बजाय समूह वाली गतिबिधियों को सरकारी कॉलेजों की तुलना में ज्यादा महत्वपूर्ण स्थान मिलता है। भारत के स्टूडेंट्स चीन की तुलना में कम कौशल के साथ कॉलेज की शुरुआत करते हैं, लेकिन वे चीन और कभी-कभी रूस के स्टूडेंट्स से भी ज्यादा तेजी से अपने स्किल्स विकसित करते हैं।

इसी सप्ताह में विश्व बैंक द्वारा सहायता प्राप्त ‘टेक्निकल क्वालिटी इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम’ का मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सामने प्रजेंटेशन दिया जायेगा।

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