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एक बच्चे ने लिखा, “उनको सलाम, जिन्होंने मेरे देश के लिए जान दी”

education-mirrorपूरे देश में उरी में हुए हमले के खिलाफ गुस्से का माहौल है। लोग ‘कड़ी कार्रवाई’ जैसे शब्दों और तथाकथित राष्ट्रवादी पत्रकारों की प्रतिक्रियावादी पत्रकारिता पर भी सवाल उठा रहे हैं। ऐसे माहौल में एक बच्चे के मन की बात पढ़ने लायक है। इस बच्चे में देश की ऐसी छवि है, जिसे रक्षा की जरूरत है। जिसे उसके जान की जरूरत है। इसके लिए वह अपने परिवार की फिक्र छोड़कर देश के लिए चिंता करना चाहता है।

“मैं एक पुलिस ऑफिसर बनकर देशवासियों की रक्षा करना चाहता हूँ। मेरे देश के लिए मैं जान देने के लिए भी तैयार हूँ। मैं एक गरीब परिवार से हूँ। मैं पुलिस बनकर एक देश की रक्षा नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की रक्षा करना चाहता हूँ। मुझे मेरे घर की नहीं पड़ी। मुझे मेरे देश की पड़ी है। मुझे देश की चिंता होती है।

मैं जबतक ज़िंदा हूँ, देश के लिए जान भी दे सकता हूँ। मैं बड़ा होकर देश के दुश्मनों को एक-एक करके मारुंगा। मैं उनको सलाम करता हूँ, जिन्होंने मेरे देश के लिए जान दी। जैसे महात्मा गाँधी। भगत सिंह। मैं भारत माँ का वीर सिपाही बनुंगा। इसकी रक्षा करुंगा और देश के दुश्मनों को मुँह तोड़ जवाब दूंगा।

मेरा दोस्त मुझसे पूछता है कि पुलिस वाला क्यों बनना चाहता है? तो मैं जवाब देता हूँ, “क्योंकि पुलिस बनना सबसे अच्छा लगता है। हमारे देश भारत में अनेक त्योहार मनाए जाते हैं। 15 अगस्त हमारा राष्ट्रीय त्योहार है क्योंकि सन 1947 में इसी दिन हमारा देश विदेशी शासन की दासता से मुक्त हुआ था।”

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