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अच्छे शिक्षकों की कहानियां कहाँ गुम हैं?

शिक्षा दार्शनिक, जॉन डिवी के विचार

जॉन डिवी का मानना था कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो स्कूल छोड़ने के बाद भी काम आए।

किसी भी स्कूल में बच्चे ऐसे शिक्षकों की काफी कद्र करते हैं जो उन्हें मन से पढ़ाते हैं। बच्चे उनकी कही बातों की कद्र करते हैं। ‘अच्छे शिक्षकों’ की परिभाषा हर बच्चे के लिए अलग-अलग होती है।

आमतौर पर बच्चे उस शिक्षक को अच्छा मानते हैं जो किसी विषय को बेहद रोचक बनाकर पढ़ाए। हर बच्चे को कक्षा में भागीदारी का मौका दे। कक्षा के सबसे कमज़ोर बच्चे तक अपनी बात को बेहद आसान भाषा में पहुंचा दे ताकि वह भी पढ़ाए जा रहे विषय को आसानी से समझ पाएं। इस तरह से होने वाली पढ़ाई सिर्फ परीक्षा में काम नहीं आती, वह परीक्षा से आगे भी जीवन में काम आती है।

नकारात्मक खबरों का मोह

शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य हमें जीवन की समस्याओं का समाधान करने में सक्षम बनाना है। ताकि हम हर परिस्थिति में अपनी कोशिशों से अपने साथ-साथ अन्य लोगों के जीवन की राह को भी आसान बना सकें। तो बात हो रही थी कि बच्चे कैसे शिक्षक को पसंद करते हैं? किसे वे अच्छा शिक्षक मानते हैं। अक्सर फेसबुक पर ऐसे शिक्षकों की तस्वीर शेयर होती है जो क्लासरूम में सो रहे होते हैं। या फिर ऐसे वीडियो शेयर होते हैं जिसमें शिक्षक किसी सामान्य ज्ञान के सवाल का ग़लत जवाब दे रहे होते हैं। या फिर ऐसी खबरें आती हैं जिसमें शिक्षक अपनी मुख्य भूमिका से इतर कुछ नकारात्मक काम कर रहे होते हैं।

ऐसे वीडियो को शेयर करने वाले लोगों की संख्या काफी है। नकारात्मक चीज़ों को प्रति हमारा क्रेज बढ़ता जा रहा है। हमें उनकी ऐसी आदत सी लग गई है कि अगर पॉजिटिव चीज़ों का जिक्र हो तो हम उसे संंदेह की दृष्टि से देखते हैं कि अरे! ऐसा तो संभव ही नहीं है। जैसे शिक्षा क्षेत्र में काम करने वाले कुछ लोग कहते हैं, “हर कोई पैसे के लिए काम करता है।” मगर पैसे के लिए काम करने का यह अर्थ तो कतई नहीं होता कि हम अपना काम ही न करें।  इस शिक्षा तंत्र में बहुत से ऐसे लोग हैं जो एक विज़न के साथ काम करते हैं। वे अपने काम को मात्र आजीविका के साधन के रूप में नहीं देखते। वे इस काम को एक जज्बे के तहत करते हैं।

एजुकेशन मिरर पर आने वाले दिनों में आप ऐसी रोचक कहानियां पढ़ेंगे। जो शिक्षकों पर हमारे भरोसे को मजबूत करती हैं। इसके साथ ही उस पहलू की भी चर्चा होगी, जिसमें सुधार की जरूरत वर्तमान शिक्षा तंत्र में है।

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