जॉन होल्ट अपनी डायरी में लिखते हैं कि छोटे बच्चे खुद से बनाई कठिन योजनाओं से जूझते समय केवल यही सोचते हैं, "लो, अभी नहीं हुआ। चलो इसे फिर से करें।" [...]
इस किताब के बारे में दीपिका लिखती हैं, "यह पुस्तक हर उस व्यक्ति को पढ़नी ही चाहिए जो पढ़ने लिखने की संस्कृति को बचाए रखने के लिए प्रयास कर रहे हैं।" [...]